भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की अगस्त बैठक पर उद्योग जगत, निवेशकों और आम लोगों की नजर टिकी हुई है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस बार केंद्रीय बैंक रेपो रेट को मौजूदा स्तर 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रख सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती महंगाई, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और मानसून से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण RBI फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव करने से बच सकता है। हालांकि अंतिम फैसला MPC की बैठक के बाद ही सामने आएगा।
महंगाई और वैश्विक हालात बने बड़ी चिंता
अर्थशास्त्रियों के अनुसार, जून में खुदरा महंगाई RBI के 4 प्रतिशत लक्ष्य से ऊपर रही, जबकि कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों ने भी महंगाई का जोखिम बढ़ाया है। ऐसे में RBI फिलहाल सतर्क रुख अपनाते हुए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करना चाहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि महंगाई नियंत्रित नहीं होती है, तो आने वाले महीनों में केंद्रीय बैंक अपनी नीति में बदलाव पर विचार कर सकता है। फिलहाल प्राथमिकता मूल्य स्थिरता बनाए रखने और आर्थिक संतुलन बनाए रखने की है।
EMI और निवेशकों पर होगा असर
यदि रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होता है, तो होम लोन, कार लोन और अन्य ऋणों की EMI में भी तत्काल कोई बदलाव देखने को नहीं मिलेगा। वहीं बैंक अपनी जमा योजनाओं और ऋण दरों में भी बड़े बदलाव से बच सकते हैं। शेयर बाजार और बॉन्ड बाजार की नजर भी RBI के रुख पर रहेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल ब्याज दर ही नहीं, बल्कि RBI की भविष्य की नीति और गवर्नर के बयान भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यदि केंद्रीय बैंक भविष्य में सख्ती के संकेत देता है, तो वित्तीय बाजारों पर उसका प्रभाव पड़ सकता है।
RBI आगे की रणनीति पर करेगा फोकस
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार सबसे ज्यादा ध्यान RBI की भविष्य की नीति पर रहेगा। यदि केंद्रीय बैंक महंगाई को लेकर चिंता जताता है, तो आने वाले महीनों में ब्याज दरों को लेकर संकेत मिल सकते हैं। वहीं यदि आर्थिक वृद्धि को प्राथमिकता दी जाती है, तो मौजूदा नीति कुछ समय तक जारी रह सकती है। फिलहाल अधिकांश अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि अगस्त की बैठक में रेपो रेट में बदलाव की संभावना कम है और RBI संतुलित एवं सतर्क दृष्टिकोण अपनाएगा।
ऐसे में आम लोगों, उद्योग जगत और निवेशकों को अब MPC के आधिकारिक फैसले का इंतजार है, जो आने वाले समय में देश की आर्थिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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