मुख्यमंत्री सचिवालय में सबसे प्रभावशाली पदों में से एक—प्रधान सचिव (Principal Secretary) के पद को लेकर प्रशासनिक और सियासी गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है। पूर्व प्रधान सचिव दीपक कुमार के राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) के उपाध्यक्ष बनने के बाद यह जिम्मेदारी किस अधिकारी को सौंपी जाएगी, इसे लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। दीपक कुमार ने लगभग आठ साल और तीन महीने तक इस अहम पद की जिम्मेदारी संभाली थी।
इस महत्वपूर्ण पद की दौड़ में पांच वरिष्ठ और अनुभवी पूर्व आईएएस अधिकारियों के नाम सबसे आगे चल रहे हैं:
1. संजय कुमार (1990 बैच)
बिहार कैडर के 1990 बैच के अधिकारी संजय कुमार जून 2026 में केंद्र में स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनके पास मुख्यमंत्री सचिवालय में काम करने का सीधा अनुभव है; वे जनवरी 2015 से 2018 के दौरान झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास के प्रधान सचिव रह चुके हैं। प्रशासनिक पकड़ और राजनीतिक समन्वय में उनकी दक्षता के चलते उनका दावा मजबूत माना जा रहा है।
2. अमरजीत सिन्हा (1983 बैच)
1983 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस अमरजीत सिन्हा नीति निर्माण और योजनाओं के धरातल पर क्रियान्वयन के विशेषज्ञ माने जाते हैं। बिहार में उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे प्रमुख विभागों का नेतृत्व किया है। केंद्र सरकार में ‘सर्व शिक्षा अभियान’ और ‘राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन’ (NRHM) के क्रियान्वयन में भी उनकी अहम भूमिका रही है।
3. राजेश भूषण (1987 बैच)
बिहार कैडर के 1987 बैच के पूर्व अधिकारी राजेश भूषण केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव रह चुके हैं। कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन आपूर्ति, अस्पतालों में व्यवस्था और राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के प्रशासनिक प्रबंधन में उनका कार्य काफी सराहा गया था।
4. सी.के. मिश्रा (1983 बैच)
1983 बैच के आईएएस सी.के. मिश्रा को बिहार और केंद्र सरकार—दोनों ही स्तरों पर काम करने का लंबा अनुभव है। वे स्वास्थ्य, ऊर्जा, आईटी और पर्यटन जैसे विभागों के साथ-साथ प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से जुड़े कार्यों का भी हिस्सा रहे हैं।
5. त्रिपुरारी शरण (1985 बैच)
बिहार के पूर्व मुख्य सचिव रहे त्रिपुरारी शरण को दो बार सेवा विस्तार मिला था और वे दिसंबर 2021 में सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद वे 31 जुलाई 2026 तक बिहार के मुख्य सूचना आयुक्त (CIC) के पद पर भी कार्यरत रहे। राज्य के प्रशासनिक तंत्र पर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।
नोट: हालांकि इन पांचों वरिष्ठ अधिकारियों के नामों को लेकर प्रशासनिक हलकों में गहन चर्चा है, लेकिन सरकार की ओर से अभी तक किसी भी नाम पर अंतिम मुहर या आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
