Plane Hijacking : हजारों फीट की ऊंचाई पर उड़ रहे विमान में अचानक अपहरणकर्ता घुस जाएं, तो यात्रियों की जिंदगी खतरे में पड़ जाती है। ऐसे समय में पायलट के सामने सबसे बड़ी चुनौती होती है कि अपहरणकर्ताओं को भनक लगे बिना जमीन पर मौजूद अधिकारियों तक खतरे की सूचना कैसे पहुंचाई जाए। इसके लिए विमान में खास तकनीकी व्यवस्था मौजूद होती है। भारत में भी Plane Hijacking (विमान अपहरण) की कई घटनाएं हुई हैं, जिन्होंने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। इनमें 1999 का कंधार विमान अपहरण सबसे ज्यादा चर्चित रहा।
Plane Hijacking के दौरान पायलट कैसे भेजता है अलर्ट?
विमान में लगे ट्रांसपॉन्डर (Transponder) की मदद से पायलट आपातकालीन स्थिति में एयर ट्रैफिक कंट्रोल (Air Traffic Control यानी ATC) को संकेत भेज सकता है। विमान अपहरण की स्थिति के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 7500 कोड (Hijack Code) निर्धारित है। पायलट इस कोड को सेट करके अधिकारियों को विमान के अपहरण का संकेत दे सकता है।
इसके अलावा, परिस्थितियां अनुकूल होने पर पायलट रेडियो (Radio Communication) के जरिए भी जानकारी दे सकता है। संकेत मिलते ही संबंधित अधिकारी सुरक्षा एजेंसियों (Security Agencies) को सतर्क कर सकते हैं। हालांकि, अपहरणकर्ताओं की मौजूदगी में पायलट के लिए हर स्थिति में अलर्ट भेजना आसान नहीं होता।
भारत में हुए Plane Hijacking के मामले
भारत में विमान अपहरण (Plane Hijacking) की चर्चित घटनाओं में 1971 में इंडियन एयरलाइंस (Indian Airlines) के विमान गंगा (Ganga) का अपहरण शामिल है। विमान को श्रीनगर से जम्मू जाते समय लाहौर ले जाया गया था। यात्रियों और चालक दल को छोड़ने के बाद विमान को जला दिया गया।
इसके बाद 1981 और 1984 में भी इंडियन एयरलाइंस के विमानों के अपहरण की घटनाएं सामने आईं। इन घटनाओं ने देश की विमानन सुरक्षा व्यवस्था (Aviation Security) को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी थीं। विमान अपहरण की इन घटनाओं के बाद सुरक्षा जांच (Security Screening) और आपातकालीन प्रक्रियाओं (Emergency Procedures) को लेकर चर्चा तेज हुई।
IC-814 Plane Hijacking ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया
24 दिसंबर 1999 को काठमांडू से दिल्ली आ रही इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-814 (Indian Airlines Flight IC-814) का अपहरण कर लिया गया। विमान में करीब 180 यात्री और चालक दल के सदस्य सवार थे। अपहरणकर्ता विमान को अमृतसर, लाहौर और दुबई होते हुए अफगानिस्तान के कंधार ले गए।
इस दौरान यात्रियों को बंधक बनाकर रखा गया और यात्री रुपिन कात्याल (Rupin Katyal) की हत्या कर दी गई। संकट को खत्म करने के लिए भारत सरकार को अपहरणकर्ताओं से बातचीत करनी पड़ी। आखिरकार 31 दिसंबर 1999 को बंधक संकट समाप्त हुआ और यात्रियों को रिहा कराया गया।
यह घटना भारतीय विमानन इतिहास (Indian Aviation History) के सबसे गंभीर संकटों में गिनी जाती है। इसने दिखाया कि Plane Hijacking की स्थिति में पायलट, सुरक्षा एजेंसियों और सरकार के बीच तालमेल कितना महत्वपूर्ण होता है।
