महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) ने भले ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया हो, लेकिन झारखंड क्रिकेट से उनका रिश्ता आज भी उतना ही मजबूत है। खास बात यह है कि धोनी किसी आधिकारिक पद पर रहते हुए नहीं, बल्कि पर्दे के पीछे रहकर राज्य के युवा क्रिकेटरों को आगे बढ़ने में मदद कर रहे हैं। रांची में जब भी उन्हें समय मिलता है, वह जेएससीए स्टेडियम (JSCA Stadium) पहुंचते हैं और युवा खिलाड़ियों से बातचीत करते हैं। उनका फोकस सिर्फ तकनीक पर नहीं, बल्कि खेल को पढ़ने और दबाव में सही फैसला लेने पर रहता है।
MS Dhoni का सबसे बड़ा मंत्र- खेल को पढ़ना सीखो
झारखंड क्रिकेट से जुड़े अधिकारियों और पूर्व खिलाड़ियों के मुताबिक महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) युवा खिलाड़ियों को सबसे ज्यादा क्रिकेट को समझने पर जोर देते हैं। वह खिलाड़ियों को बताते हैं कि मैदान पर सिर्फ अपनी तकनीक पर निर्भर रहना काफी नहीं है, बल्कि मैच की परिस्थिति को समझना भी उतना ही जरूरी है।
जेएससीए से जुड़े सौरभ तिवारी (Saurabh Tiwary) के मुताबिक धोनी जब रांची में होते हैं तो स्टेडियम जाकर जूनियर से लेकर सीनियर खिलाड़ियों तक से मिलते हैं। वह उभरते खिलाड़ियों पर नजर रखते हैं और यह भी बताते हैं कि किन क्रिकेटरों को भविष्य के लिए देखा जाना चाहिए।
रांची के युवा खिलाड़ियों में बढ़ रहा आत्मविश्वास
महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) का असर सिर्फ सलाह तक सीमित नहीं है। उनकी कहानी ने झारखंड के खिलाड़ियों को यह विश्वास दिया कि छोटे शहर और राज्य से निकलकर भी भारतीय क्रिकेट में बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है।
पूर्व झारखंड खिलाड़ी और अंडर-23 कोच ईशांक जग्गी (Ishank Jaggi) का मानना है कि धोनी ने झारखंड के खिलाड़ियों को सबसे पहले यह विश्वास दिलाया कि वे देश के लिए खेल सकते हैं। अब ईशान किशन (Ishan Kishan), कुमार कुशाग्र (Kumar Kushagra), शिखर मोहन (Shikhar Mohan), अनुकूल रॉय (Anukul Roy) और मोहम्मद क़ौनेन कुरैशी (Md Kounain Quraishi) जैसे खिलाड़ियों ने राज्य की नई पीढ़ी की उम्मीदें बढ़ाई हैं।
दलीप ट्रॉफी ने दिखा दी झारखंड की नई ताकत
दलीप ट्रॉफी 2026 में ईस्ट जोन की खिताबी जीत ने झारखंड के युवा क्रिकेटरों की बढ़ती ताकत को और सामने ला दिया। कप्तान ईशान किशन (Ishan Kishan) ने शानदार प्रदर्शन किया, जबकि शिखर मोहन (Shikhar Mohan) ने भी अपनी बल्लेबाजी से प्रभावित किया।शिखर मोहन (Shikhar Mohan) ने फाइनल में 85 रन की अहम पारी खेली और ईशान किशन (Ishan Kishan) से मिली सलाह को भी अपने प्रदर्शन में महत्वपूर्ण बताया।
यही वजह है कि झारखंड क्रिकेट में महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) की भूमिका अब सिर्फ एक महान पूर्व क्रिकेटर की नहीं रह गई है। वह बिना किसी औपचारिक पद के भी युवा खिलाड़ियों को आत्मविश्वास, मैच की समझ और बड़े मंच के दबाव से निपटने की सोच दे रहे हैं। अगर यही सिलसिला जारी रहा तो आने वाले वर्षों में झारखंड से कई और बड़े क्रिकेटर निकल सकते हैं।
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