मध्यप्रदेश सरकार ने डेयरी सेक्टर को मजबूत बनाने के लिए बड़ा लक्ष्य तय किया है। मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने प्रतिदिन 52 लाख किलोग्राम दूध खरीद का लक्ष्य घोषित किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।
सरकार का मानना है कि खेती के साथ डेयरी को जोड़कर किसानों को अतिरिक्त आय का स्थायी स्रोत मिल सकता है। इसी वजह से डेयरी गतिविधियों को “किसान कल्याण वर्ष” के तहत प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हों।
26 हजार गांवों को डेयरी नेटवर्क से जोड़ने की योजना
इस योजना के तहत राज्य के लगभग 26 हजार गांवों को डेयरी नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इससे गांव-गांव तक दूध संग्रहण और विपणन की सुविधा पहुंचेगी। सरकार सहकारी समितियों के माध्यम से इस नेटवर्क को मजबूत करने पर जोर दे रही है।
वर्ष 2025-26 में 1,700 से अधिक नई डेयरी समितियां बनाई गई हैं और सैकड़ों निष्क्रिय समितियों को फिर से सक्रिय किया गया है। इससे स्पष्ट है कि सरकार इस क्षेत्र में संरचनात्मक सुधार करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।
तकनीक और डिजिटल सिस्टम का बढ़ता उपयोग
डेयरी सेक्टर को आधुनिक बनाने के लिए सरकार डिजिटल तकनीकों का सहारा ले रही है। मोबाइल ऐप आधारित दूध खरीद प्रणाली शुरू की गई है, जिससे किसान रियल टाइम में दूध की मात्रा, गुणवत्ता और कीमत की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
इसके अलावा, फील्ड फोर्स मॉनिटरिंग ऐप के जरिए निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों का भरोसा भी मजबूत होगा।
प्रोसेसिंग और मार्केटिंग पर जोर
सरकार केवल दूध खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रोसेसिंग और मार्केटिंग को भी मजबूत करने पर ध्यान दे रही है। नए डेयरी प्लांट, मिल्क पाउडर यूनिट और आधुनिक पैकेजिंग पर काम किया जा रहा है।
ब्रांडिंग को बेहतर बनाकर डेयरी उत्पादों की बाजार में पहुंच बढ़ाने की योजना है। इससे राज्य के डेयरी उत्पाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा सहारा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल मध्यप्रदेश को “मिल्क कैपिटल” बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है। डेयरी सेक्टर के विस्तार से किसानों की आय में वृद्धि होगी, रोजगार बढ़ेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी
कुल मिलाकर, 52 लाख किलो दूध खरीद का लक्ष्य केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि राज्य के किसानों के जीवन स्तर को सुधारने की एक बड़ी रणनीति है। अगर यह योजना सफल होती है, तो मध्यप्रदेश देश के प्रमुख डेयरी राज्यों में शामिल हो सकता है।
