Gautam Gambhir: आईसीसी टी20 विश्व कप 2026 (ICC T20 World Cup 2026) की ट्रॉफी भारत ने न्यूजीलैंड (IND vs NZ) को 96 रनों से हराकर अपने नाम कर ली है, लेकिन अब एक नया बवाल खड़ा हो गया है. भारत और न्यूजीलैंड के बीच ये फाइनल मुकाबला अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला गया. भारतीय टीम (Team India) ने न्यूजीलैंड (New Zealand Cricket Team) को 96 रनों से हराया और उसके बाद जब आईसीसी टी20 विश्व कप 2026 की ट्रॉफी मिली तो भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव (Suryakumar Yadav) ट्रॉफी लेकर स्टेडियम के बगल में मौजूद बाल हनुमान मंदिर में पहुंचे.
भारतीय टीम के कप्तान और कोच के ऐसा करने के बाद भारत को 1983 विश्व कप जीताने वाले पूर्व खिलाड़ी कीर्ति आजाद (Kirti Azad) ने इसे शर्मनाक बता दिया है. कीर्ति आजाद ने इसे शर्मनाक बताया, जिसके बाद ईशान किशन (Ishan Kishan) और हरभजन सिंह (Harbhajan Singh) ने उन्हें जवाब दिया और अब इस लिस्ट में भारतीय कोच गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) का नाम जुड़ गया है.
भारतीय कोच Gautam Gambhir ने कीर्ति आजाद को दिया करारा जवाब
कोच गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) की कोचिंग में टीम इंडिया ने आईसीसी टी20 विश्व कप 2026 की ट्रॉफी जीती. इसके बाद उनसे कीर्ति आजाद के इस बयान के बारे में जब एक पॉडकास्ट में पूछा गया तो भारतीय कोच गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) ने कहा कि
“मैं इस बारे में क्या कहूं. मुझे लगता है कि इस सवाल का जवाब देना भी सही नहीं है. यह पूरे देश के लिए एक बड़ा पल है. मुझे लगता है कि यह जरूरी है कि हम वर्ल्ड कप का जश्न मनाएं. इसीलिए मैं कहता हूं कि कुछ खास बयानों को उठाने का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि वे सिर्फ आपकी उपलब्धियों को कमजोर करते हैं. अगर आप उन 15 खिलाड़ियों की कोशिशों को कमजोर करना चाहते हैं तो कल कोई भी उठकर कुछ भी कह देगा.”
भारतीय कोच गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) ने कीर्ति आजाद को करारा जवाब देते हुए कहा कि
“यह लड़कों के साथ सही नहीं है. सोचिए लड़कों ने क्या-क्या झेला होगा. वे कितने प्रेशर से गुजरे होंगे. साउथ अफ्रीका से मैच हारने के बाद लड़कों पर किस तरह का प्रेशर था और अगर आप ऐसा बयान दे रहे हैं, तो आप अपने ही खिलाड़ी और अपनी ही टीम को नीचा दिखा रहे हैं. ऐसा नहीं करना चाहिए.”
कीर्ति आजाद ने कप्तान और कोच की आस्था को राजनीतिक रूप देने की किया कोशिस
भारत को 1983 विश्व कप जीताने वाले कीर्ति आजाद ने अपने सोशल मीडिया पर लिखा कि
“1983 में कपिल देव की अगुवाई में विश्व कप जीतने वाली टीम में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई, हर धर्म के खिलाड़ी थे और उस वक्त ट्रॉफी को मातृभूमि भारत को समर्पित किया गया था. अगर ट्रॉफी हनुमान मंदिर ले जाई गई, तो मस्जिद, चर्च या गुरुद्वारा क्यों नहीं?”
उन्होंने आगे कहा कि
“मोहम्मद सिराज ट्रॉफी मस्जिद नहीं ले गए और संजू सैमसन, जो टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में से एक रहे, इसे चर्च नहीं ले गए. यह ट्रॉफी 140 करोड़ भारतीयों की है, किसी एक धर्म की नहीं.”
