उत्तर प्रदेश के जालौन जिले की उरई नगर पालिका परिषद में कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं की जांच के दौरान माहौल उस समय गर्म हो गया, जब IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही और अधिशासी अधिकारी राम अचल कुरील के बीच अभिलेख उपलब्ध कराने को लेकर तीखी बहस हो गई।
रिंकू सिंह राही बुधवार को नगर पालिका कार्यालय जांच के लिए पहुंचे थे। उनका कहना था कि जांच के लिए पहले मांगे गए कई महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। वहीं अधिशासी अधिकारी ने जांच अधिकारी और दस्तावेज सौंपने की प्रक्रिया को लेकर अपना पक्ष रखा।
सभासदों की शिकायत के बाद शुरू हुआ मामला
मामले की शुरुआत 10 जून को हुई थी, जब नगर पालिका के एक दर्जन से अधिक सभासदों ने अधिशासी अधिकारी पर कथित भ्रष्टाचार और मनमानी के आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी को शिकायत दी थी। बाद में 20 जून को दोबारा शिकायत देकर निविदाओं, आउटसोर्सिंग एजेंसियों और भुगतान प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की गई।
शिकायतों के बाद जिलाधिकारी ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही को मामले की जांच की जिम्मेदारी सौंपी। आरोप अभी जांच के अधीन हैं और अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
रिंकू सिंह के ‘सेटिंग’ वाले बयान से बढ़ा विवाद
जांच के दौरान अधिशासी अधिकारी राम अचल कुरील का कहना था कि संबंधित रिकॉर्ड जांच समिति के अध्यक्ष को पहले ही उपलब्ध कराया जा चुका है। इस पर रिंकू सिंह राही ने जांच अधिकारी बदले जाने से संबंधित जिलाधिकारी का आदेश दिखाने को कहा। बातचीत के दौरान दोनों के बीच बहस बढ़ गई।
इसी दौरान राही ने EO पर उनसे मिलने के बजाय कथित तौर पर ‘सेटिंग’ करने आने की बात कही। यह टिप्पणी भी चर्चा में आ गई। इसके बाद EO वहां से चले गए, जबकि रिंकू सिंह राही और उनकी टीम ने उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच जारी रखी।
करीब तीन घंटे तक खंगाले गए दस्तावेज
रिंकू सिंह राही ने पहले नगर पालिका प्रशासन को पत्र भेजकर आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा था। निर्धारित समय तक रिकॉर्ड नहीं मिलने पर उन्होंने 29 जुलाई को कार्यालय पहुंचकर अभिलेखों की जांच की। टीम ने जन्म प्रमाण पत्र शाखा, लेखा अनुभाग, कर विभाग सहित कई प्रशासनिक रिकॉर्ड देखे और दस्तावेजों की स्कैनिंग भी कराई।
हालांकि प्रकाश विभाग, नजूल शाखा, निर्माण विभाग और सफाई निरीक्षक कार्यालय बंद मिले। जांच करीब तीन घंटे तक चली। रिंकू सिंह राही के मुताबिक फिलहाल उद्देश्य सभी जरूरी अभिलेख जुटाकर उनका परीक्षण करना है। अब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि सभासदों द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और प्रशासन आगे क्या कार्रवाई करता है।
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