20 फरवरी 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ के अंतिम दिन एक अप्रत्याशित राजनीतिक प्रदर्शन ने सबका ध्यान खींचा। इस दौरान भारतीय युवा कांग्रेस (Indian Youth Congress) के कुछ कार्यकर्ताओं ने शर्ट उतारकर विरोध प्रदर्शन किया, जिससे कार्यक्रम स्थल पर अफरा-तफरी मच गई। प्रदर्शन का मुद्दा मुख्य रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हालिया भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ था।
कार्यकर्ता पहले सुरक्षा घेरा तोड़कर प्रदर्शन स्थल के अंदर प्रवेश करने में सफल हुए। उन्होंने हाथ में बैनर-पोस्टर और टी-शर्ट पकड़े हुए नारे लगाए जिन पर “PM is Compromised,” “India-US Trade Deal” और “Epstein Files” जैसे संदेश लिखे थे। विरोध प्रदर्शन में शामिल कुछ युवाओं ने अपनी शर्टें हटाकर ‘शर्टलेस’ होकर विरोध में नारेबाजी की, जिससे वहां उपस्थित अन्य प्रतिभागियों और दर्शकों में हैरानी की स्थिति उत्पन्न हो गई।
इस शर्मनाक हरकत के बाद पुलिस ने शुरू की कार्यवाही
दिल्ली पुलिस ने विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तुरंत कदम उठाए। पुलिस ने लगभग 10 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और तिलक मार्ग थाना ले जाकर सुनिश्चित कार्रवाई शुरू की। अधिकारियों ने बताया कि ऐसे कई आरोप हैं जिनके तहत कानूनी प्रक्रियाएं लागू की जा रही हैं। इनमें निषेध आदेश का उल्लंघन, असामाजिक जमावड़ा और सार्वजनिक कार्य में बाधा जैसी धाराएं शामिल हो सकती हैं।
पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने क्यूआर कोड के आधार पर ऑनलाइन पंजीकरण करके कार्यक्रम में प्रवेश किया था और फिर अचानक विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। जांच अधिकारी यह भी पता लगा रहे हैं कि सुरक्षा व्यवस्था में कैसे यह चूक हुई कि विरोधकर्ता कार्यक्रम के भीतर पहुंच गए।
बीजेपी ने कांग्रेस को घेरा, बताया “राष्ट्रीय शर्म”
घटना के तुरंत बाद सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नेताओं ने युवा कांग्रेस के प्रदर्शन की कड़ी आलोचना की। भाजपा प्रवक्ताओं ने इस प्रदर्शन को “राष्ट्रीय शर्म” बताते हुए कहा कि यह भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने की कोशिश थी, खासकर जब देश एक प्रमुख तकनीकी सम्मेलन का आयोजन कर रहा था। भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि कांग्रेस के लिए ‘AI’ का मतलब एंटी-इंडिया है और यह प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि को धूमिल करने की कोशिश है।
वहीं कांग्रेस के कुछ नेताओं ने इस प्रदर्शन को देश के युवाओं की बेरोजगारी और असंतोष की आवाज़ बताते हुए इसका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन सरकार की नीतियों के खिलाफ युवाओं की नाराज़गी और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज़ उठाने का तरीका है।
यह विरोध प्रदर्शन उच्च-प्रोफ़ाइल तकनीकी सम्मेलन के दौरान हुआ, जिससे कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों और मीडिया का ध्यान भी इकठ्ठा हुआ। इस राजनीतिक विवाद ने देश में राजनीतिक तनाव और विपक्ष-सरकार के बीच जारी संघर्ष को और बढ़ा दिया है, और आगामी दिनों में इसके राजनीतिक प्रभाव पर बहस जारी रहने की संभावना है।
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