उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में आयोजित संत सभा के दौरान गाय को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कुछ मौलवियों की ओर से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने संबंधी ज्ञापन दिए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि गाय सनातन संस्कृति में केवल एक पशु नहीं, बल्कि माता का स्वरूप है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गाय को सिर्फ राष्ट्रीय पशु के रूप में देखने के बजाय उसकी सांस्कृतिक और धार्मिक महत्ता को समझना चाहिए।
ज्ञापन में ‘पशु’ शब्द पर जताई आपत्ति
मुख्यमंत्री के मुताबिक कुछ दिन पहले उनके पास भी ऐसा एक ज्ञापन पहुंचा था, जिसमें गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की गई थी। योगी ने बताया कि उस ज्ञापन में गाय के लिए ‘पशु’ शब्द का इस्तेमाल किया गया था।
उन्होंने संबंधित मौलवियों से इस बारे में बातचीत करते हुए सवाल किया कि सनातन परंपरा में पूजनीय गाय के लिए इस तरह के शब्द का इस्तेमाल क्यों किया गया। उनके अनुसार, मौलवियों ने इसे गलती बताया।
‘यह गलती थी या शरारत’, सीएम ने उठाया सवाल
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उन्होंने संबंधित लोगों से यह भी पूछा कि यह केवल एक बार हुई गलती थी या फिर बार-बार होने वाली शरारत। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में गाय के प्रति सम्मान और गोसंरक्षण को भारतीय संस्कृति से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।
उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को गोमाता की पूजा का तरीका सिखाने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि गाय का सम्मान उसकी परंपरा और संस्कारों का हिस्सा रहा है।
गाय को बताया सांस्कृतिक धरोहर
मुख्यमंत्री ने कहा कि गाय का महत्व केवल सनातन धर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक धरोहर का भी हिस्सा है। उन्होंने ‘गावो विश्वस्य मातरः’ का उल्लेख करते हुए गाय को व्यापक रूप से माता के स्वरूप में देखने की बात कही। योगी के अनुसार, हिंदू समाज के संस्कारों में गोमाता का विशेष स्थान है और कई शुभ कार्यों में गोपूजन की परंपरा रही है।
राम मंदिर आंदोलन और महंत रामचंद्र दास परमहंस का जिक्र
अयोध्या के दिगंबर अखाड़े में यह कार्यक्रम राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख संत रहे ब्रह्मलीन महंत रामचंद्र दास परमहंस की 23वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित किया गया था।
मुख्यमंत्री ने परमहंस के जीवन और श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के संकल्प को याद किया। उन्होंने कहा कि उनका पूरा जीवन राम मंदिर आंदोलन के लिए समर्पित रहा।
विभाजन को लेकर कांग्रेस पर भी हमला
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने 1947 के देश विभाजन को लेकर कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि उस समय मजबूत और दृढ़ नेतृत्व होता तो देश के विभाजन और उससे जुड़ी हिंसा जैसी परिस्थितियों को टाला जा सकता था। उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे मजबूत नेतृत्व का उदाहरण देते हुए अपनी राजनीतिक बात रखी।
सीएम योगी का यह बयान ऐसे समय आया है जब गोसंरक्षण और गाय को लेकर राजनीतिक तथा सामाजिक बहस लगातार चर्चा में रहती है। अयोध्या में दिए गए उनके संबोधन में धार्मिक परंपरा, गोसंरक्षण और देश के इतिहास से जुड़े कई मुद्दे एक साथ सामने आए।
