उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान समाजवादी पार्टी की पिछली सरकार पर कानून-व्यवस्था समेत कई मुद्दों को लेकर निशाना साधा। उन्होंने 2017 से पहले के उत्तर प्रदेश की स्थिति का जिक्र करते हुए अपने शासनकाल में हुए बदलावों का दावा किया। उनके बयान की रिपोर्ट आजतक ने प्रकाशित की है।
2017 से पहले की स्थिति का किया जिक्र
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में अपराधियों और दबंगों का प्रभाव था। उन्होंने अपने संबोधन में कानून-व्यवस्था को लेकर उस दौर की स्थिति पर सवाल उठाए और कहा कि प्रदेश में असुरक्षा का माहौल बना हुआ था। ये मुख्यमंत्री द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं, जिन्हें स्वतंत्र रूप से तथ्य के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।
बेटियों की सुरक्षा और पढ़ाई का मुद्दा
योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण में महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि पिछली सरकार के दौरान कई जिलों में बेटियों की पढ़ाई और सुरक्षा प्रभावित थी। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि उस समय आपराधिक तत्वों के कारण परिवारों में चिंता का माहौल रहता था। ये दावे उनके राजनीतिक संबोधन का हिस्सा थे।
राशन और जमीन पर भी लगाए आरोप
मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार के दौरान गरीबों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचने को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि बिचौलियों और दबंगों के कारण गरीबों का राशन और पेंशन प्रभावित होती थी। इसके साथ ही उन्होंने जमीनों पर कब्जे और अराजकता के आरोप भी लगाए।
कर्फ्यू और दंगों का किया उल्लेख
योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण में दावा किया कि 2017 से पहले प्रदेश में लंबे समय तक कर्फ्यू और दंगों की स्थिति रहती थी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था में बदलाव आया है और त्योहारों के दौरान उपद्रव रोकने के लिए प्रशासन की ओर से कार्रवाई की जाती है। हिंदुस्तान टाइम्स ने भी उनके इसी कार्यक्रम के संदर्भ में पिछली सरकारों पर लगाए गए कानून-व्यवस्था संबंधी आरोपों की रिपोर्ट की है।
इंसेफ्लाइटिस का भी उठाया मुद्दा
मुख्यमंत्री ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफ्लाइटिस की समस्या का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि 2017 से पहले इस बीमारी के कारण बच्चों की बड़ी संख्या में मौतें होती थीं और सरकार ने बाद में बीमारी की रोकथाम के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित की। आजतक की रिपोर्ट में उनके हवाले से कहा गया कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पहले इंसेफ्लाइटिस से करीब 500 बच्चों की मौत होती थी, जबकि अब मौतों का आंकड़ा शून्य हो गया है। इस आंकड़े को मुख्यमंत्री के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
2027 चुनाव से पहले तेज हुई बयानबाजी
उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक बहस तेज हो रही है। हाल की रिपोर्टों में भाजपा की चुनावी रणनीति में कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा, बिजली और कल्याणकारी योजनाओं जैसे मुद्दों को प्रमुखता दिए जाने की बात सामने आई है। समाजवादी पार्टी ने भी सरकार के कामकाज को लेकर अपने आरोप और दावे सार्वजनिक किए हैं।
इस तरह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ताजा बयान में 2017 से पहले और उसके बाद के उत्तर प्रदेश की स्थिति को लेकर राजनीतिक तुलना देखने को मिली। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए कानून-व्यवस्था और शासन से जुड़े मुद्दे राज्य की राजनीतिक बहस में प्रमुख बने हुए हैं।
