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गोरखपुर में CM योगी ने गजनवी-सोमनाथ का किया जिक्र, बोले- भारत की ज्ञान परंपरा को नष्ट करना था मकसद

CM Yogi Adityanath Gorakhpur BJP
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गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को भारतीय ज्ञान परंपरा पर आयोजित एक व्याख्यान सत्र को संबोधित किया। श्री गोरखनाथ मंदिर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक आक्रमणों का उल्लेख किया। अपने संबोधन में उन्होंने 11वीं सदी के महमूद गजनवी और सोमनाथ मंदिर के प्रसंग का उदाहरण देते हुए कहा कि विदेशी आक्रमणकारियों का उद्देश्य केवल भारत की संपत्ति लूटना नहीं था, बल्कि देश की बौद्धिक और सनातन विरासत को कमजोर करना भी था। यह विवरण मुख्यमंत्री के संबोधन और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है।

सोमनाथ मंदिर और गजनवी का प्रसंग

योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण में महमूद गजनवी के सोमनाथ मंदिर पर हमले का उल्लेख किया। उनके अनुसार, मंदिर के पुजारियों ने गजनवी से मंदिर और प्रतिमा को नुकसान नहीं पहुंचाने की अपील करते हुए सोना और आभूषण ले जाने की पेशकश की थी। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि गजनवी ने केवल लूट को अपना उद्देश्य नहीं बताया और भारत की सनातन परंपरा को नष्ट करना उसका मुख्य लक्ष्य बताया।

भारत की पहचान ज्ञान परंपरा से

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की पहचान केवल प्राकृतिक संपदा या आर्थिक समृद्धि से नहीं रही, बल्कि इसकी प्राचीन ज्ञान परंपरा ने इसे विश्व स्तर पर विशिष्ट बनाया। उन्होंने तक्षशिला और नालंदा जैसे प्राचीन शिक्षा केंद्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में हजारों वर्षों से ज्ञान और शोध की परंपरा रही है।

रामायण काल का भी किया उल्लेख

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने रामायण काल के दंडकारण्य प्रसंग का भी जिक्र किया। उन्होंने ऋषियों के आश्रमों और उस समय सामने आई चुनौतियों का संदर्भ देते हुए ज्ञान और साधना के केंद्रों की रक्षा की परंपरा की बात कही। इस उदाहरण को उन्होंने भारत की सांस्कृतिक और ज्ञान परंपरा के व्यापक संदर्भ से जोड़ा।

काशी, उज्जैन और अन्य केंद्रों का जिक्र

योगी आदित्यनाथ ने काशी, उज्जैन, कांची और अन्य स्थानों को प्राचीन ज्ञान केंद्रों के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कुंभ की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल धार्मिक स्नान तक सीमित नहीं थी, बल्कि संतों और विद्वानों के मिलने, विचारों पर चर्चा करने और ज्ञान साझा करने का अवसर भी रही है।

प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण पर जोर

मुख्यमंत्री ने भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े प्राचीन ग्रंथों और पांडुलिपियों के संरक्षण की आवश्यकता भी बताई। उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में मंदिरों, मठों, परिवारों और विद्वानों के पास ऐसी सामग्री मौजूद है। उन्होंने बताया कि वाराणसी स्थित संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में एक लाख से अधिक प्राचीन पांडुलिपियों के संग्रह और उनके संरक्षण व डिजिटलीकरण का काम चल रहा है।

प्रमाण के साथ बात रखने की अपील

मुख्यमंत्री ने लोगों से किसी भी विषय पर तथ्य और प्रमाण के आधार पर बात करने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, प्रमाण आधारित जानकारी से भ्रम और गलत सूचना का मुकाबला करने में मदद मिल सकती है।

सात दिवसीय कार्यक्रम में हुआ संबोधन

मुख्यमंत्री का यह संबोधन श्री गोरखनाथ मंदिर में आयोजित सात दिवसीय पुण्यतिथि कार्यक्रम का हिस्सा था। यह आयोजन ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ महाराज की 57वीं और राष्ट्रसंत महंत अवेद्यनाथ महाराज की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर किया जा रहा है। कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपरा और सामाजिक विषयों से जुड़े विभिन्न सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।