उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गाजियाबाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समन्वय बैठक की। यह बैठक नेहरू नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित की गई, जिसमें संघ के कई वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए। जानकारी के अनुसार यह बैठक करीब ढाई घंटे तक चली और इसमें सरकार और संगठन के बीच समन्वय के साथ-साथ आने वाले समय की राजनीतिक रणनीति पर भी चर्चा हुई।
बताया जा रहा है कि बैठक में मेरठ प्रांत से जुड़े तीन दर्जन से अधिक संघ पदाधिकारी मौजूद थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दौरान संघ के अधिकारियों से सरकार के कामकाज को लेकर फीडबैक लिया और उनके सुझाव भी सुने।
आगामी चुनावों की तैयारी पर चर्चा
सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों को लेकर भी चर्चा की गई। सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर जोर दिया गया ताकि जमीनी स्तर पर योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन हो सके। संघ पदाधिकारियों ने विभिन्न क्षेत्रों की समस्याओं और जनता की अपेक्षाओं के बारे में मुख्यमंत्री को अवगत कराया।
इस दौरान यह भी बताया गया कि इस तरह की क्षेत्रीय समन्वय बैठकें लंबे अंतराल के बाद आयोजित की जा रही हैं। इससे पहले भी योगी आदित्यनाथ विभिन्न क्षेत्रों में संघ के साथ समन्वय बैठकों में शामिल हो चुके हैं। इन बैठकों का उद्देश्य संगठन और सरकार के बीच संवाद को मजबूत करना बताया जा रहा है।
विकास और प्रशासन से जुड़े सुझाव
बैठक में संघ पदाधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। इनमें सरकारी अस्पतालों और स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, मानव संसाधन बढ़ाने और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने जैसे मुद्दे शामिल रहे। इसके अलावा थानों में भ्रष्टाचार पर सख्ती से नियंत्रण लगाने की आवश्यकता भी उठाई गई।
कुछ पदाधिकारियों ने लोनी क्षेत्र में सड़कों की खराब स्थिति का मुद्दा भी उठाया और जल्द सुधार की मांग की। वहीं ‘हर घर जल योजना’ के तहत गांवों में खुदाई के कारण खराब हुई सड़कों की मरम्मत कराने का सुझाव भी दिया गया।
बैठक के बाद अन्य कार्यक्रमों में शामिल हुए सीएम
बैठक के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्थानीय नेताओं और अधिकारियों के साथ कानून-व्यवस्था की स्थिति की भी समीक्षा की। इसके बाद वह आगे के कार्यक्रमों के लिए नोएडा रवाना हो गए।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस तरह की समन्वय बैठकें भाजपा और संघ के बीच संवाद को मजबूत करने के साथ-साथ आने वाले चुनावों की रणनीति तय करने में भी अहम भूमिका निभाती हैं। ऐसे में गाजियाबाद में हुई यह बैठक संगठनात्मक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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