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उत्तर प्रदेश चुनाव 2027 में चिराग पासवान का ‘ट्रिपल P’ फॉर्मूला, पंडित-पासवान-पासी के सहारे BJP और सपा को चुनौती

Chirag Paswan
उत्तर प्रदेश चुनाव 2027 में चिराग पासवान का ‘ट्रिपल P’ फॉर्मूला, पंडित-पासवान-पासी के सहारे BJP और सपा को चुनौती
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने प्रदेश में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की तैयारी तेज कर दी है। पार्टी की रणनीति में ‘ट्रिपल P’ यानी पंडित, पासवान और पासी समीकरण को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी का लक्ष्य दलित वोट बैंक के साथ अन्य सामाजिक वर्गों को जोड़कर उत्तर प्रदेश में अपना संगठन मजबूत करना है।

एलजेपी (रामविलास) बिहार में अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने के बाद अब यूपी में सक्रियता बढ़ा रही है। इसके लिए प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बैठकें, चौपाल और जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है।

104 विधानसभा सीटों पर खास नजर

एलजेपी (रामविलास) के यूपी प्रभारी और जमुई सांसद अरुण भारती के मुताबिक, पार्टी विशेष रूप से ऐसी 104 विधानसभा सीटों पर संगठन मजबूत कर रही है, जहां पासी और पासवान मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। पार्टी इन क्षेत्रों में दलित चौपाल और दलित पंचायत जैसे कार्यक्रमों के जरिए मतदाताओं तक पहुंचने की रणनीति बना रही है।

उत्तर प्रदेश को पूर्वांचल, पश्चिमी यूपी, मध्य यूपी और बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में बांटकर संगठन विस्तार पर काम किया जा रहा है। पार्टी अध्यक्ष चिराग पासवान की भी प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में सभाएं कराने की तैयारी है।

अखिलेश के PDA के सामने P3 फॉर्मूला

उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी लंबे समय से PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण पर जोर दे रही है। ऐसे में चिराग पासवान की पार्टी का P3 फॉर्मूला राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एलजेपी का फोकस विशेष रूप से पासी और पासवान समुदाय के मतदाताओं पर है।

पार्टी नेताओं का दावा है कि 2024 लोकसभा चुनाव में इन समुदायों के वोटों का एक हिस्सा सपा-कांग्रेस गठबंधन की तरफ गया था, जिससे एनडीए को कई सीटों पर नुकसान हुआ। अब 2027 से पहले इन मतदाताओं को दोबारा एनडीए के साथ जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

NDA के साथ या अकेले? बाद में होगा फैसला

अरुण भारती के अनुसार, एलजेपी (रामविलास) उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है, लेकिन पार्टी एनडीए के साथ कितनी सीटों पर उतरेगी या अलग रणनीति अपनाएगी, इसका अंतिम फैसला चिराग पासवान करेंगे। बिहार में पार्टी भाजपा के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ चुकी है और अब उसी राजनीतिक प्रभाव को उत्तर प्रदेश में बढ़ाने की कोशिश है।

2027 चुनाव से पहले संगठन मजबूत करने के साथ कल्याणकारी योजनाओं और दलित समुदाय से जुड़े मुद्दों को जनता तक पहुंचाने की योजना है। ऐसे में चिराग पासवान का ‘पंडित-पासवान-पासी’ समीकरण आने वाले महीनों में यूपी की चुनावी राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बन सकता है।

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