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Akhilesh Yadav ने योगी आदित्यनाथ को लेकर लगाया बड़ा राजनीतिक आरोप

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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी पर बड़ा राजनीतिक हमला बोला है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से जुड़े कथित भूमि खरीद विवाद का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि भाजपा अपने ही मुख्यमंत्रियों को हटाने की रणनीति पर काम कर रही है। अखिलेश यादव ने कहा कि यह पूरा विवाद केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे उत्तर प्रदेश और राजस्थान की राजनीति भी जुड़ी हुई है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है।

अखिलेश यादव का कहना है कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को लेकर सामने आए आरोप भाजपा की अंदरूनी राजनीति का हिस्सा हैं। उन्होंने दावा किया कि पहले किसी मुख्यमंत्री को विवादों में घेरा जाता है, फिर उसके नेतृत्व पर सवाल उठाए जाते हैं और बाद में उसे बदलने की कोशिश होती है। सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि इसी रणनीति के तहत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी हटाने की तैयारी की जा रही है। हालांकि उन्होंने अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं किया।

सपा प्रमुख ने यह भी कहा कि भाजपा केवल मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि राजस्थान और उत्तर प्रदेश में भी नेतृत्व परिवर्तन की योजना बना रही है। उनके अनुसार यह पूरा घटनाक्रम राजनीतिक संदेश देने की कोशिश है। अखिलेश यादव ने कहा कि जनता को इन घटनाओं को अलग-अलग नहीं बल्कि एक व्यापक राजनीतिक रणनीति के रूप में देखना चाहिए। उनके बयान के बाद विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

दूसरी ओर भाजपा ने अखिलेश यादव के आरोपों को पूरी तरह निराधार और राजनीतिक बयानबाजी करार दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर किसी तरह की चर्चा नहीं है और विपक्ष केवल भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव की ओर से भी पहले स्पष्ट किया जा चुका है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने या उनके परिवार ने कोई नई भूमि नहीं खरीदी है। भाजपा नेताओं ने कहा कि विपक्ष बिना तथ्यों के राजनीतिक माहौल बनाने का प्रयास कर रहा है।

फिलहाल अखिलेश यादव के इस बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। आने वाले दिनों में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। हालांकि अभी तक अखिलेश यादव के दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और भाजपा ने उन्हें सिरे से खारिज कर दिया है। ऐसे में यह मुद्दा फिलहाल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित दिखाई दे रहा है।