राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह और बिहार विशेष कार्य बल (STF) के महानिदेशक (DG) कुंदन कृष्णन के बीच जारी तीखा विवाद अब मुख्यमंत्री तक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सांसद सुधाकर सिंह के शिकायती पत्र पर गंभीरता से संज्ञान लेते हुए पूरे मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री सचिवालय (CMO) के उप सचिव मो. इमरान ने गृह विभाग के प्रधान सचिव को औपचारिक पत्र भेजकर सांसद द्वारा उठाए गए मुद्दों की छानबीन करने और समुचित निर्णय लेने का आदेश जारी किया है।
सांसद सुधाकर सिंह के पत्र में उठाए गए तीन मुख्य बिंदु
बक्सर से सांसद सुधाकर सिंह ने 15 अक्टूबर को मुख्यमंत्री सचिवालय को पत्र लिखकर तीन प्रमुख मांगों पर त्वरित कार्रवाई का आग्रह किया था:
भारत भूषण तिवारी एनकाउंटर/हत्या मामले की निष्पक्ष जांच: सांसद लगातार इस पुलिस कार्रवाई और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
पुलिस कमान की जवाबदेही तय करना: घटना के समय मौके पर मौजूद और तत्कालीन पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
₹5 करोड़ का मानहानि नोटिस: जनहित और जनसरोकार के मुद्दे उठाने पर डीजी कुंदन कृष्णन द्वारा भेजे गए ₹5 करोड़ के मानहानि कानूनी नोटिस पर प्रशासनिक कार्रवाई।
मुख्यमंत्री सचिवालय ने गृह विभाग को स्पष्ट निर्देश दिया है कि इस मामले में की जाने वाली पूरी जांच और कार्रवाई से सांसद सुधाकर सिंह तथा मुख्यमंत्री सचिवालय को भी समय पर अवगत कराया जाए।
जनप्रतिनिधि बनाम नौकरशाही का टकराव
विवाद की शुरुआत तब हुई जब सांसद सुधाकर सिंह ने भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर पुलिस प्रशासन और विशेष रूप से डीजी कुंदन कृष्णन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। इसके बाद आईपीएस अधिकारी कुंदन कृष्णन की ओर से सांसद को ₹5 करोड़ के मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा गया था।
मानहानि नोटिस मिलने के बाद सुधाकर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसे लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया था। उन्होंने तर्क दिया था:
लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है और जनप्रतिनिधि सीधे जनता के प्रति जवाबदेह होते हैं।
नौकरशाह जनता के सेवक हैं, ऐसे में जनहित के सवाल उठाने पर जनप्रतिनिधियों को डराने या मानहानि नोटिस भेजने की परंपरा लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
मुख्यमंत्री द्वारा गृह विभाग को जांच सौंपे जाने के बाद अब बिहार के प्रशासनिक और सियासी गलियारों में इस हाई-प्रोफाइल मामले पर नजरें टिक गई हैं।
