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बिहार में पैर पसार रहा सूखा नशा, CM सम्राट चौधरी ने जताई चिंता; बोले- शराबबंदी के बाद लोग खोज रहे अल्टरनेट रास्ते

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बिहार में शराबबंदी के बाद अन्य मादक पदार्थों (सूखा नशा) के बढ़ते चलन पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। मंगलवार को “नशामुक्त बिहार अभियान 2026” का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जैसे ही राज्य में शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगा, असामाजिक तत्वों और गिरोहों ने सूखे नशे का जाल फैलाने का प्रयास शुरू कर दिया और लोग इसके ‘वैकल्पिक रास्ते’ (Alternative Routes) तलाशने लगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार अब इस सूखे नशे के खिलाफ भी एक व्यापक और निर्णायक अभियान चलाएगी।

मादक पदार्थों की जब्ती में भारी उछाल: आंकड़े पेश किए

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य में पुलिस और मद्य निषेध विभाग द्वारा हाल के वर्षों में जब्त किए गए नशीले पदार्थों के तुलनात्मक आंकड़े साझा किए:

चरस: साल 2024 में 282 किलोग्राम चरस जब्त हुई थी, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 400 किलोग्राम पहुंच गई।

हेरोइन: वर्ष 2024 में 42 किलोग्राम की तुलना में 2025 में जब्ती बढ़कर 65 किलोग्राम हो गई।

अफीम: अफीम की बरामदगी में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई, जो 10 किलोग्राम से उछलकर 77 किलोग्राम तक पहुंच गई।

8 जिलों में विशेष अभियान: पटना, वैशाली, आरा और सीमावर्ती इलाके रडार पर

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने ऐसे 8 प्रमुख जिलों को चिन्हित किया है, जहां सिंथेटिक और सूखे नशीले पदार्थों की आपूर्ति तथा खपत में बढ़ोतरी देखी गई है:

प्राथमिकता वाले क्षेत्र: इसमें राजधानी पटना, वैशाली, समस्तीपुर, भोजपुर (आरा) के साथ-साथ राज्य के कई संवेदनशील सीमावर्ती जिले शामिल हैं।

इन चिन्हित जिलों में तस्करों के नेटवर्क को ध्वस्त करने और अंतरराज्यीय तस्करी पर लगाम लगाने के लिए विशेष पुलिस कार्रवाई व कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाए जाएंगे।

‘नशा-मुक्त भारत’ के राष्ट्रीय संकल्प के साथ समन्वय

अपने संबोधन में सम्राट चौधरी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस संकल्प का उल्लेख किया, जिसके तहत वर्ष 2029 तक पूरे देश को नशा-मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया गया है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा जनहित में लागू की गई शराबबंदी के मूल उद्देश्यों को तभी पूरी तरह हासिल किया जा सकता है, जब युवा पीढ़ी को हर तरह के नशे से बचाया जाए। सरकार का अंतिम लक्ष्य एक स्वस्थ, नशामुक्त और उज्ज्वल बिहार का निर्माण करना है।