बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून को और अधिक सख्ती व प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दो-टूक शब्दों में स्पष्ट किया कि सरकार को शराबबंदी से होने वाले राजस्व नुकसान की कोई चिंता नहीं है, क्योंकि यह कानून जनहित और सामाजिक सुधार के लिए लागू किया गया है। पटना के अधिवेशन भवन में आयोजित राज्यस्तरीय समारोह में उन्होंने ‘नशामुक्त बिहार अभियान’ का औपचारिक शुभारंभ किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नशा मुक्ति के लिए विशेष हेल्पलाइन, व्हाट्सएप चैटबॉट और जन-जागरूकता प्रचार वाहनों (जागरूकता रथ) को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ये वाहन 26 नवंबर तक गांव-गांव जाकर ऑडियो-विजुअल माध्यम से आम जनता और युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करेंगे।
राजस्व से ऊपर जनहित: नीतीश कुमार के फैसले को आगे बढ़ाने का संकल्प
सम्राट चौधरी ने कहा कि वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जनता और परिवारों की भलाई को सर्वोपरि रखते हुए शराबबंदी का ऐतिहासिक फैसला लिया था:
उस समय राज्य का कुल बजट आकार लगभग ₹50,000 से ₹55,000 करोड़ का था, फिर भी सरकार ने राजस्व की परवाह किए बिना इसे लागू किया।
वर्तमान सरकार भी इस नीति पर पूरी दृढ़ता से कायम है और किसी भी सूरत में शराबबंदी के साथ समझौता नहीं किया जाएगा।
केंद्र सरकार के 2029 तक देश को नशामुक्त बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप बिहार इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभाएगा।
‘सूखे नशे’ (सिंथेटिक ड्रग्स) के खिलाफ बड़ा प्रहार
मुख्यमंत्री ने चिंता जताई कि शराबबंदी के बाद कुछ गिरोह राज्य में सूखे नशे (स्मैक, चरस, हेरोइन, अफीम) का जाल फैलाने की कोशिश कर रहे हैं:
जब्ती के आंकड़े साझा किए:
चरस: वर्ष 2024 में 282 किलोग्राम चरस जब्त हुई थी, जो 2025 में बढ़कर 400 किलोग्राम तक पहुंच गई।
हेरोइन: वर्ष 2024 में 42 किलोग्राम की तुलना में 2025 में 65 किलोग्राम हेरोइन पकड़ी गई।
अफीम: वर्ष 2025 में 77 किलोग्राम अफीम जब्त की गई।
मुख्यमंत्री ने मद्य निषेध विभाग और पुलिस को निर्देश दिया कि इन नशीले पदार्थों की अंतरराज्यीय तस्करी की कड़ियों को तोड़ा जाए और हॉटस्पॉट जिलों में विशेष कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाए जाएं।
पुलिस को खुली छूट, मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष अदालतें
तस्करों के नेटवर्क पर कार्रवाई: मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे के अवैध कारोबारियों और माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस प्रशासन को पूरी स्वायत्तता (फ्री हैंड) दी गई है।
20 गुना अधिक केस: राज्य में नशीले पदार्थों के खिलाफ दर्ज होने वाले मुकदमों की संख्या में 20 गुना से अधिक की वृद्धि हुई है। लगभग 1,700 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनके त्वरित विचारण (ट्रायल) के लिए जिलों में विशेष अदालतों की व्यवस्था की गई है।
सामूहिक शपथ: कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों, युवाओं और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े सभी जिलाधिकारियों व पुलिस अधीक्षकों को नशा न करने और समाज को नशामुक्त बनाने की सामूहिक शपथ दिलाई गई।
वरिष्ठ अधिकारी व मंत्री रहे मौजूद
समारोह को उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन मंत्री मदन सहनी, उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर और मद्य निषेध विभाग के सचिव संजय कुमार सिंह ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, डीजीपी प्रीता वर्मा, एडीजी रत्न संजय, सूचना एवं जन-संपर्क विभाग के सचिव नवीन कुमार और जीविका के सीईओ हिमांशु शर्मा सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
