कांके के सुकुरहुट्टू स्थित बैंकेट हॉल में आयोजित झारखंड भारतीय जनता पार्टी (BJP) की दो दिवसीय प्रदेश कार्यसमिति की बैठक रविवार को राजनीतिक प्रस्ताव पारित करने के साथ संपन्न हो गई। बैठक के दूसरे दिन नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य की वर्तमान महागठबंधन सरकार के खिलाफ “अबुआ सरकार से ठगुआ सरकार तक” के नारे के साथ राजनीतिक प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
इस राजनीतिक प्रस्ताव का पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन, पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, गढ़वा विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी तथा जमुआ विधायक डॉ. मंजू कुमारी ने औपचारिक अनुमोदन किया।
प्रस्ताव में उठाए गए मुख्य मुद्दे
प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू की अध्यक्षता में पारित इस प्रस्ताव में हेमंत सोरेन सरकार की कार्यशैली पर कड़े सवाल खड़े किए गए:
भ्रष्टाचार और चुनावी वादाखिलाफी: सरकार पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने और जनता से किए गए वादों से मुकरने का आरोप लगाया गया।
बिगड़ती कानून-व्यवस्था व महिला सुरक्षा: राज्य में अपराध की बढ़ती घटनाओं और महिलाओं की सुरक्षा के मोर्चे पर विफलता को लेकर चिंता जताई गई।
संसाधनों की लूट और घुसपैठ: राज्य की खनिज संपदा की लूट, अवैध घुसपैठ और आदिवासियों के उत्पीड़न के मामलों पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया गया।
युवाओं और छात्रों से वादाखिलाफी: बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में धांधली और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ के खिलाफ व्यापक आंदोलन छेड़ने का संकल्प लिया गया।
बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस और झामुमो पर साधा निशाना
राजनीतिक प्रस्ताव पेश करते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा कि आजादी की लड़ाई में झारखंड के सेनानियों ने ‘जल, जंगल और जमीन’ के लिए कुर्बानियां दीं, लेकिन कांग्रेस और झामुमो ने आदिवासियों के नाम पर सिर्फ राजनीति की और महापुरुषों को सम्मान नहीं दिया।
उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने झारखंड को अलग राज्य का दर्जा दिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ घोषित कर मान बढ़ाया। मरांडी ने आरोप लगाया कि वर्तमान शासनकाल में आदिवासियों की जमीन की लूट सबसे अधिक हुई है और विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं।
दो दिनों तक चले इस गहन मंथन के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़क पर उतरकर निर्णायक संघर्ष करने का संकल्प दोहराया।
