गोरखपुर के सिविल लाइंस स्थित गोरखपुर क्लब में दिव्यांगजन सशक्तीकरण को लेकर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को समारोह में दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और विभिन्न सहायक उपकरण वितरित किए। कार्यक्रम का आयोजन दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग और हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
509 लाभार्थियों को मिले 664 उपकरण
कार्यक्रम में कुल 509 लाभार्थियों को 664 सहायक उपकरण वितरित किए गए। इन उपकरणों की कुल कीमत करीब सवा करोड़ रुपये बताई गई है। लाभार्थियों की जरूरत के अनुसार मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल, ई-ट्राइसाइकिल, ट्राइसाइकिल, स्मार्ट केन, ब्रेल किट, हियरिंग एड, स्मार्टफोन और कृत्रिम अंग उपलब्ध कराए गए।
127 लोगों को मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल
समारोह में 127 दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल दी गई। इसके अलावा 25 लाभार्थियों को ई-ट्राइसाइकिल और 70 लोगों को सामान्य ट्राइसाइकिल प्रदान की गई। इन उपकरणों का उद्देश्य दिव्यांगजनों के आवागमन को आसान बनाना और उन्हें दैनिक जीवन में अधिक आत्मनिर्भर बनाने में मदद करना है।
स्मार्ट केन और ब्रेल किट भी बांटे
दृष्टिबाधित लाभार्थियों के लिए भी कार्यक्रम में विशेष सहायता उपलब्ध कराई गई। 155 लाभार्थियों को कुल 319 स्मार्ट केन और ब्रेल किट प्रदान की गईं। वहीं, 90 दिव्यांगजनों को हियरिंग एड दिए गए। पांच लाभार्थियों को स्मार्टफोन भी उपलब्ध कराए गए।
दिव्यांग पेंशन बढ़ाने का ऐलान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दिव्यांगजनों की पेंशन राशि में जल्द एक बार फिर बढ़ोतरी की जाएगी। उन्होंने बताया कि पहले दिव्यांग पेंशन 300 रुपये थी, जिसे बढ़ाकर 500 और फिर 1000 रुपये किया गया। अब इसमें फिर वृद्धि की जाएगी।
सभी 18 मंडलों में बनेंगे पुनर्वास केंद्र
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी 18 मंडलों में जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि गोरखपुर में सीतापुर आई हॉस्पिटल परिसर में ऐसा केंद्र शुरू हो चुका है। इन केंद्रों के माध्यम से दिव्यांगजनों को पुनर्वास, प्रशिक्षण और जरूरी सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित करने पर जोर है।
हर विधानसभा क्षेत्र में लगेंगे शिविर
सीएम योगी ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में शिविर लगाकर ऐसे दिव्यांगजनों को सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा, जिन्हें अभी पेंशन या अन्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। सरकार के अनुसार प्रदेश में 17 लाख से अधिक दिव्यांगजनों की डिजिटल पहचान और कार्ड से जुड़ी व्यवस्था की गई है।
बचपन से सशक्तीकरण पर जोर
मुख्यमंत्री ने दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण की शुरुआत बचपन से करने की जरूरत बताई। उन्होंने शुरुआती जांच, थेरेपी, विशेष शिक्षा और तकनीकी सहायता पर जोर दिया। तीन से सात वर्ष तक के दिव्यांग बच्चों के लिए बचपन डे-केयर सेंटरों के विस्तार की बात भी कही गई। रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने पर भी जोर दिया गया।
