अगर भारतीय क्रिकेट (Indian Cricket) के महान खिलाड़ियों की बात होती है, तो अक्सर सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली और विराट कोहली जैसे नाम सामने आते हैं। लेकिन इन सितारों के पीछे ऐसे कई गुरु भी रहे हैं, जिन्होंने छोटी उम्र में उनकी प्रतिभा को पहचाना और उसे निखारने में अहम भूमिका निभाई। ऐसे ही एक क्रिकेट गुरु ने भारत को कई शानदार खिलाड़ी दिए और उनके एक शिष्य ने आगे चलकर क्रिकेट की दुनिया में ऐसा मुकाम हासिल किया, जिसे आज भी ‘क्रिकेट का भगवान’ कहा जाता है।
Indian Cricket में जिसने सचिन की प्रतिभा को पहचाना
सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) के क्रिकेट करियर में रमाकांत आचरेकर (Ramakant Achrekar) का योगदान बेहद खास माना जाता है। मुंबई के शिवाजी पार्क में आचरेकर ने सचिन की बल्लेबाजी को करीब से देखा और उनकी प्रतिभा को सही दिशा देने का काम किया। आचरेकर की ट्रेनिंग काफी अनुशासित मानी जाती थी।
वह खिलाड़ियों को लगातार अभ्यास करवाते थे और छोटी-छोटी तकनीकी गलतियों पर भी ध्यान देते थे। सचिन ने भी अपने गुरु से मिले इस प्रशिक्षण को पूरी गंभीरता से अपनाया। आचरेकर सिर्फ सचिन के ही गुरु नहीं थे। उन्होंने विनोद कांबली (Vinod Kambli) समेत कई युवा क्रिकेटरों को भी प्रशिक्षित किया। उनके मार्गदर्शन में तैयार हुए खिलाड़ियों ने आगे चलकर भारतीय क्रिकेट में अपनी पहचान बनाई।
गुरु की सीख ने बनाया महान क्रिकेटर
सचिन तेंदुलकर के अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत 1989 में हुई। इसके बाद उन्होंने बल्लेबाजी के लगभग हर बड़े रिकॉर्ड को अपने नाम किया। टेस्ट और वनडे क्रिकेट में शतकों का शतक पूरा करने वाले सचिन दुनिया के सबसे महान बल्लेबाजों में गिने जाते हैं। सचिन कई मौकों पर अपने गुरु रमाकांत आचरेकर को याद कर चुके हैं। उनका मानना रहा कि आचरेकर सर ने उन्हें सिर्फ क्रिकेट की तकनीक ही नहीं सिखाई, बल्कि अनुशासन, मेहनत और लगातार बेहतर बनने की सोच भी दी।
यही वजह है कि भारतीय क्रिकेट में रमाकांत आचरेकर का नाम एक ऐसे गुरु के तौर पर लिया जाता है, जिन्होंने प्रतिभा को पहचानकर उसे महानता तक पहुंचाने का रास्ता दिखाया। उनके शिष्य सचिन तेंदुलकर ने आगे चलकर भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और दुनिया उन्हें प्यार से ‘क्रिकेट का भगवान’ कहने लगी।
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