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केशव प्रसाद मौर्य की अखिलेश यादव को खुली चुनौती, श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद पर मांगा जवाब

Keshav Prasad Maurya on Akhilesh Yadav
केशव प्रसाद मौर्य की अखिलेश यादव को खुली चुनौती, श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद पर मांगा जवाब
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उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Prasad Maurya) ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद को लेकर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यदि अखिलेश यादव वास्तव में भगवान श्रीकृष्ण के प्रति आस्था रखते हैं तो उन्हें इस मुद्दे पर अपना स्पष्ट रुख जनता के सामने रखना चाहिए।

केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Prasad Maurya) ने कहा कि यह केवल राजनीतिक विषय नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़ा मामला है। उनके बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

Keshav Prasad Maurya ने अखिलेश यादव से मांगा स्पष्ट जवाब

केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Prasad Maurya) ने कहा कि अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वे श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पक्ष में हैं या शाही ईदगाह के पक्ष में। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इस तरह के संवेदनशील मुद्दों पर अपना रुख स्पष्ट करने से बचता है। मौर्य ने कहा कि जनता अब हर राजनीतिक दल की सोच और नीति को समझना चाहती है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी हमेशा देश की सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक स्थलों के सम्मान की बात करती रही है तथा इसी दिशा में कार्य करती रहेगी।

धार्मिक आस्था और राजनीति पर बढ़ी बहस

उपमुख्यमंत्री के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। भाजपा नेताओं ने मौर्य के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े विषयों पर सभी दलों को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। वहीं विपक्षी दलों का कहना है कि जनता के सामने रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और महंगाई जैसे मुद्दे अधिक महत्वपूर्ण हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है और इस पर समय-समय पर विभिन्न दलों की ओर से बयान आते रहे हैं।

राजनीतिक बयानबाजी के बीच बढ़ी चर्चा

केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Prasad Maurya) के बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने दृष्टिकोण से इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

फिलहाल श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह से जुड़ा मामला न्यायिक प्रक्रिया का भी हिस्सा है, जबकि राजनीतिक दल इसे लेकर लगातार अपनी-अपनी राय रख रहे हैं। आने वाले दिनों में इस विषय पर और बयान सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

इस बीच राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों से जुड़े ऐसे मुद्दे आगामी समय में भी प्रदेश की राजनीति और सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में बने रह सकते हैं।

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