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हरिद्वार में संतों ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति की उठाई मांग, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की पहल की अपील

Haridwar
हरिद्वार में संतों ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति की उठाई मांग, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की पहल की अपील
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उत्तराखंड के हरिद्वार में आयोजित संत सम्मेलन के दौरान कई संतों और धर्माचार्यों ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। संतों ने कहा कि मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और इसके संबंध में लंबे समय से मांग की जा रही है।

सम्मेलन में उपस्थित संतों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस विषय पर उचित पहल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए गंभीर प्रयास किए जाने चाहिए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संत, महंत और श्रद्धालु मौजूद रहे।

धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत पर जोर

सम्मेलन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण सभी की साझा जिम्मेदारी है। संतों ने विभिन्न धार्मिक स्थलों के विकास और संरक्षण के लिए सरकारों द्वारा किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों का संरक्षण केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा हुआ है। संतों ने लोगों से सामाजिक सौहार्द बनाए रखने और धार्मिक परंपराओं के प्रति सम्मान की भावना रखने की अपील की।

सरकार से उचित कार्रवाई की मांग

संतों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आग्रह किया कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े विषय पर संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप आवश्यक कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे का समाधान कानून के दायरे में और शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए।

सम्मेलन में मौजूद कई वक्ताओं ने कहा कि धार्मिक मामलों में समाज के सभी वर्गों के बीच संवाद और आपसी विश्वास बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में इस विषय पर सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास होगा।

शांति, सद्भाव और कानून के पालन की अपील

सम्मेलन के अंत में संतों ने देशवासियों से शांति, सद्भाव और आपसी भाईचारे की भावना बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक या सामाजिक मुद्दे का समाधान संविधान और कानून के दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए। साथ ही धार्मिक स्थलों के संरक्षण, सांस्कृतिक विरासत के संवर्धन और समाज में सकारात्मक वातावरण बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।

संतों ने विश्वास जताया कि संवाद, संवैधानिक प्रक्रिया और जनसहयोग के माध्यम से धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों पर संतुलित समाधान की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।

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