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क्या है OSH कोड? जिसके लिए UP सरकार खत्म कर रही 60 साल पुराना शॉप एक्ट, जानें आप पर कैसे पड़ेगा असर

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क्या है OSH कोड? जिसके लिए UP सरकार खत्म कर रही 60 साल पुराना शॉप एक्ट, जानें आप पर कैसे पड़ेगा असर
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What is OSH Code: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) सरकार राज्य में श्रम कानूनों को आधुनिक और सरल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। इसके तहत शॉप एक्ट (Shops and Establishments Act) और ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस (OSH) कोड लागू करने की तैयारी है।

इन बदलावों का उद्देश्य कर्मचारियों को बेहतर सुरक्षा और सुविधाएं देना, साथ ही उद्योगों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लिए नियमों को अधिक पारदर्शी और आसान बनाना है।

क्या है शॉप एक्ट?

शॉप एक्ट वह कानून है, जो दुकानों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, मॉल, होटल, रेस्तरां और निजी संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों की सेवा शर्तों को नियंत्रित करता है।

इसके तहत काम के घंटे, छुट्टियां, वेतन भुगतान, साप्ताहिक अवकाश और कर्मचारियों के अधिकार तय किए जाते हैं। नए प्रावधानों के लागू होने के बाद कई प्रक्रियाएं ऑनलाइन होंगी और अनुपालन पहले की तुलना में आसान होगा।

OSH कोड से क्या होगा बदलाव?

OSH कोड का उद्देश्य कार्यस्थलों को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना है। इसके तहत कर्मचारियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और कार्य परिस्थितियों से जुड़े मानकों को मजबूत किया जाएगा। कई श्रम कानूनों को एकीकृत कर एक व्यापक व्यवस्था तैयार की गई है, जिससे उद्योगों और कर्मचारियों दोनों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

कर्मचारियों और नियोक्ताओं पर असर

नए नियम लागू होने के बाद नियुक्ति पत्र, डिजिटल रिकॉर्ड, कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों और श्रम अनुपालन पर विशेष जोर रहेगा। महिलाओं के रात्रिकालीन कार्य, बैठने की सुविधा, कार्य के घंटे और अन्य प्रावधानों में भी संशोधन किए जाने का प्रस्ताव है। सरकार का मानना है कि इससे निवेश बढ़ेगा, रोजगार के अवसर पैदा होंगे और कर्मचारियों के अधिकार भी अधिक सुरक्षित होंगे।

Yogi Adityanath सरकार का उद्देश्य

राज्य सरकार का लक्ष्य श्रम कानूनों को सरल, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाना है। इससे एक ओर कारोबार करना आसान होगा, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों को सुरक्षित और बेहतर कार्य वातावरण उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि नए प्रावधान लागू होने के बाद उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को भी गति मिल सकती है।

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अभिषेक को खेल से अटूट रिश्ते ने पत्रकार बनाया। 2016 में मीडिया डेब्यू किया तब से...