अयोध्या दौरे को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गर्म हो गई है। कांग्रेस के प्रस्तावित अयोध्या दौरे और राम मंदिर से जुड़े मुद्दों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस जनता को भ्रमित करने और झूठ के सहारे राजनीति करने का प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों ने वर्षों तक रामभक्तों की आस्था का सम्मान नहीं किया, वे अब खुद को भगवान श्रीराम का भक्त बताने की कोशिश कर रहे हैं। इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया।
योगी का कांग्रेस पर सीधा हमला
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि कांग्रेस का बदलता रुख केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी का इतिहास भगवान राम और रामभक्तों के प्रति सम्मान का नहीं रहा है, लेकिन अब चुनावी माहौल को देखते हुए वह अपनी छवि बदलने का प्रयास कर रही है। योगी ने यह भी कहा कि जनता सच्चाई को अच्छी तरह जानती है और केवल बयानबाजी से इतिहास नहीं बदला जा सकता। उनके अनुसार प्रदेश सरकार धार्मिक स्थलों के विकास और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए लगातार काम कर रही है।
कांग्रेस ने भी किया पलटवार
दूसरी ओर कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी का अयोध्या दौरा पूरी तरह धार्मिक और लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत था। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि उनके प्रतिनिधिमंडल को अयोध्या जाने से रोकने की कोशिश की गई और कई नेताओं को नजरबंद भी किया गया। पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए सरकार से जवाब मांगा। कांग्रेस का कहना है कि वह राम मंदिर से जुड़े मुद्दों पर पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रही है तथा श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करती है।
चुनावी माहौल में तेज हुई सियासत
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अयोध्या और राम मंदिर का मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में हमेशा महत्वपूर्ण रहा है। ऐसे में दोनों प्रमुख दल इस विषय पर अपने-अपने पक्ष को मजबूती से जनता के सामने रखने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले समय में यह विवाद और राजनीतिक बयानबाजी का कारण बन सकता है। फिलहाल भाजपा और कांग्रेस दोनों अपने-अपने दावों पर कायम हैं, जबकि जनता की नजर इस पूरे घटनाक्रम और आगे होने वाली राजनीतिक गतिविधियों पर टिकी हुई है।
