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योगी आदित्यनाथ का बड़ा एक्शन, 100 से ज्यादा कोचिंग संस्थानों पर चला बुलडोजर नहीं बल्कि सीलिंग अभियान

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उत्तर प्रदेश में लखनऊ के एक कोचिंग संस्थान में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बाद राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पूरे प्रदेश में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत अब तक 100 से अधिक कोचिंग संस्थानों पर कार्रवाई की जा चुकी है, जबकि कई संस्थानों को सील भी कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि छात्रों की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।

सुरक्षा मानकों की गहन जांच

जांच के दौरान प्रशासन, फायर विभाग, पुलिस और विकास प्राधिकरण की संयुक्त टीमें कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण कर रही हैं। अधिकारियों ने फायर सेफ्टी उपकरण, आपातकालीन निकास, भवन की संरचनात्मक मजबूती, वैध पंजीकरण और अन्य सुरक्षा मानकों की जांच की। कई संस्थानों में गंभीर अनियमितताएं मिलीं, जिनमें बिना फायर एनओसी संचालन, बेसमेंट में कक्षाएं चलाना और भवन नियमों का उल्लंघन प्रमुख रहा। ऐसे मामलों में तत्काल सीलिंग और कानूनी कार्रवाई की गई।

मुख्यमंत्री ने दिए सख्त निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी कोचिंग संस्थानों, अस्पतालों, मॉल, निजी संस्थानों और अन्य सार्वजनिक भवनों का फायर सेफ्टी ऑडिट मिशन मोड में पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा नियमों का पूरी सख्ती से पालन कराया जाएगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि नियमों का पालन कराने के दौरान आम लोगों को अनावश्यक परेशानी न हो।

छात्रों की सुरक्षा बनी सर्वोच्च प्राथमिकता

सरकार ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि सभी पंजीकृत और अपंजीकृत कोचिंग संस्थानों का सर्वे कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए। जिन संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था अधूरी मिलेगी, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी। नियमित निरीक्षण की व्यवस्था भी लागू की जा रही है ताकि भविष्य में सुरक्षा मानकों का पालन लगातार सुनिश्चित किया जा सके। सरकार का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना भी उतना ही आवश्यक है। इस व्यापक अभियान का उद्देश्य केवल नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि लाखों छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और शिक्षा संस्थानों में जवाबदेही बढ़ाना भी है।