उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि जिन लोगों ने प्रदेश और देश की राजनीति में पहचान का संकट पैदा किया था, आज वही स्वयं पहचान के संकट से जूझ रहे हैं। मुख्यमंत्री का यह बयान वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों और विपक्ष की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनता अब जाति, क्षेत्र और तुष्टिकरण की राजनीति से आगे बढ़ चुकी है तथा विकास, सुरक्षा और सुशासन को प्राथमिकता दे रही है।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने विकास और कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। राज्य में निवेश बढ़ा है, रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं और आधारभूत ढांचे का तेजी से विस्तार हुआ है। उन्होंने दावा किया कि सरकार की नीतियों का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंच रहा है, जिसके कारण जनता का विश्वास लगातार मजबूत हुआ है।
उन्होंने कहा कि जिन राजनीतिक दलों ने वर्षों तक समाज को बांटने का कार्य किया, वे अब जनता के बीच अपनी प्रासंगिकता खो चुके हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, लोगों ने यह समझ लिया है कि केवल वादों और नारों से विकास संभव नहीं है। इसके लिए स्पष्ट नीयत, मजबूत नेतृत्व और प्रभावी प्रशासन की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि जनता उन दलों को नकार रही है जो केवल राजनीतिक लाभ के लिए समाज में भ्रम फैलाने का प्रयास करते हैं।
योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोच्च होती है और वही तय करती है कि किसे समर्थन देना है। उन्होंने कहा कि जब कोई राजनीतिक दल जनता की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरता, तब उसे अपनी दिशा और कार्यशैली पर पुनर्विचार करना पड़ता है। विपक्ष की वर्तमान स्थिति इसी का परिणाम है। उन्होंने कहा कि जनता के बीच अपनी विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए केवल आलोचना पर्याप्त नहीं होती, बल्कि सकारात्मक और रचनात्मक राजनीति भी आवश्यक होती है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। विभिन्न क्षेत्रों में हुए सुधारों ने राज्य की नई पहचान बनाई है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में भी विकास की यह यात्रा जारी रहेगी और उत्तर प्रदेश देश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।
अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता सब कुछ देख रही है और लोकतंत्र में अंतिम निर्णय उसी के हाथ में होता है। इसलिए राजनीतिक दलों को आत्ममंथन कर जनता के हितों को सर्वोपरि रखना चाहिए।
