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योगी सरकार में एनकाउंटर की कार्रवाई: कानून-व्यवस्था पर बड़ा दावा

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उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार लगातार सख्त रुख अपनाने का दावा करती रही है। सरकार के अनुसार वर्ष 2017 से 2024 के बीच अपराधियों के खिलाफ चलाए गए विशेष अभियानों और पुलिस कार्रवाई के तहत बड़ी संख्या में एनकाउंटर हुए हैं। हाल ही में सामने आए आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में पुलिस मुठभेड़ों में 138 हिंदू और 67 मुस्लिम अपराधी मारे गए। सरकार का कहना है कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य अपराध और संगठित गिरोहों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना था।

अपराधियों के खिलाफ अभियान

योगी सरकार के सत्ता में आने के बाद पुलिस को अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। इसके तहत वांछित अपराधियों, गैंगस्टरों और गंभीर मामलों में शामिल आरोपियों के खिलाफ अभियान चलाया गया। सरकार का दावा है कि इस नीति के कारण कई कुख्यात अपराधी या तो गिरफ्तार हुए, आत्मसमर्पण करने को मजबूर हुए या पुलिस मुठभेड़ों में मारे गए।

अधिकारियों का कहना है कि इन अभियानों से प्रदेश में अपराध की घटनाओं में कमी आई है और आम लोगों में सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है। पुलिस का दावा है कि एनकाउंटर केवल उन परिस्थितियों में हुए जब अपराधियों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हमला किया या पुलिस पर गोलीबारी की।

विपक्ष के सवाल

हालांकि, विपक्षी दलों और मानवाधिकार संगठनों ने एनकाउंटर नीति पर कई बार सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून का शासन सर्वोपरि होना चाहिए और आरोपियों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत सजा मिलनी चाहिए। कई संगठनों ने एनकाउंटर मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग भी की है।

विपक्ष का आरोप है कि सरकार एनकाउंटर के आंकड़ों को उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करती है, जबकि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। दूसरी ओर सरकार इन आरोपों को खारिज करते हुए कहती है कि सभी कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर की गई है।

कानून-व्यवस्था पर राजनीतिक बहस

उत्तर प्रदेश में एनकाउंटर की नीति लंबे समय से राजनीतिक चर्चा का विषय बनी हुई है। समर्थकों का मानना है कि सख्त कार्रवाई से अपराधियों में डर पैदा हुआ है और प्रदेश की कानून-व्यवस्था में सुधार आया है। वहीं आलोचक इसे मानवाधिकार और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर मुद्दा मानते हैं।

आने वाले समय में भी यह विषय राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बना रह सकता है। हालांकि एक बात स्पष्ट है कि कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण का मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है और सरकार अपनी उपलब्धियों में इसे प्रमुखता से शामिल करती रही है।