Posted inउत्तर प्रदेश, राजनीति

“योगी आदित्यनाथ का बड़ा लक्ष्य: 2030 तक 15% और 2047 तक 20% हरित आवरण”

News on WhatsAppJoin Now

उत्तर प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक बड़ा विज़न सामने आया है। Yogi Adityanath ने राज्य के हरित आवरण (ग्रीन कवर) को बढ़ाने के लिए स्पष्ट लक्ष्य तय किया है—वर्ष 2030 तक 15% और 2047 तक 20%। यह केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि इसे जनआंदोलन बनाने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।

हरित क्रांति की ओर बढ़ता उत्तर प्रदेश

मुख्यमंत्री ने “मेगा प्लांटेशन अभियान 2026” की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश को तेजी से हरित क्रांति की ओर बढ़ना होगा। इसके तहत एक ही दिन में 35 करोड़ पौधे लगाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।

राज्य में पहले भी बड़े स्तर पर वृक्षारोपण हुआ है। 2017 से 2025 के बीच 242 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए, जिससे हरित आवरण लगभग 9.96% तक पहुंच गया है।

यह आंकड़े बताते हैं कि यदि इसी गति से प्रयास जारी रहे, तो निर्धारित लक्ष्य हासिल करना संभव है।

माइक्रो प्लानिंग और तकनीक पर जोर

इस अभियान की खास बात है—माइक्रो प्लानिंग। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि हर गांव और शहर स्तर पर योजनाएं बनाकर उनका प्रभावी क्रियान्वयन किया जाए।

इसके साथ ही आधुनिक तकनीकों का उपयोग भी किया जा रहा है। ‘हरीतिमा’ ऐप, GIS मैपिंग, QR कोड ट्रैकिंग और प्लांटेशन मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए पौधरोपण की निगरानी की जा रही है।

2025 के सर्वे में लगाए गए पौधों की 80% तक जीवित रहने की दर दर्ज की गई, जो इस अभियान की सफलता को दर्शाती है।

एक्सप्रेसवे, स्कूल और गांव बनेंगे हरित केंद्र

सरकार ने वृक्षारोपण को केवल जंगलों तक सीमित नहीं रखा है। गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया जाएगा।

इसके अलावा:

हर आंगनवाड़ी केंद्र में कम से कम 5 पौधे लगाए जाएंगे

स्कूल और कॉलेज के हर छात्र को एक पौधा लगाने के लिए प्रेरित किया जाएगा

इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ समाज में जागरूकता भी बढ़ेगी।

जनभागीदारी से बनेगा हरित भविष्य

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि यह अभियान तभी सफल होगा, जब इसमें आम जनता की भागीदारी होगी। ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे अभियानों के जरिए लोगों को जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

गांवों में “ग्रीन चौपाल” जैसे कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं, जिससे लोगों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित हो रही है।