मध्य प्रदेश के लिए 2026 का यह वर्ष वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से बेहद खास साबित हो रहा है। राज्य के मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने हाल ही में Kanha Tiger Reserve में जंगली भैंसों (Wild Buffalo) को छोड़कर एक ऐतिहासिक परियोजना की शुरुआत की है। यह कदम केवल एक वन्यजीव पुनर्वास कार्यक्रम नहीं, बल्कि राज्य के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
दरअसल, जंगली भैंसा मध्य प्रदेश से लगभग 100 साल पहले विलुप्त हो चुका था। अब असम के Kaziranga National Park से चार जंगली भैंसों को लाकर कान्हा में बसाया गया है। यह एक इंटर-स्टेट (राज्य-से-राज्य) सहयोग का बेहतरीन उदाहरण है, जिसमें दोनों राज्यों के वन विभागों ने मिलकर इस परियोजना को सफल बनाया।
इन भैंसों को पहले “सॉफ्ट रिलीज़ एनक्लोजर” में रखा गया है, ताकि वे नए वातावरण के अनुकूल हो सकें। विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रक्रिया बेहद जरूरी होती है क्योंकि इससे जानवरों को धीरे-धीरे जंगल के प्राकृतिक माहौल में ढलने का समय मिलता है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस पहल को “ऐतिहासिक दिन” बताते हुए कहा कि इससे राज्य के जंगलों की जैव विविधता (Biodiversity) मजबूत होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह परियोजना घास के मैदानों (grassland ecosystem) को पुनर्जीवित करने में मदद करेगी, जो कई अन्य वन्यजीवों के लिए भी जरूरी है।
इस परियोजना के तहत कुल सात भैंसों की पहचान की गई थी, जिनमें से चार को पहले चरण में लाया गया है। इन भैंसों ने करीब 2000 किलोमीटर का लंबा सफर तय किया, जिसमें विशेष सुरक्षा और पशु-चिकित्सा निगरानी का पूरा ध्यान रखा गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह परियोजना सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में कान्हा में जंगली भैंसों की स्थायी आबादी विकसित हो सकती है। इससे न केवल पर्यावरण को फायदा होगा, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
यह पहल पहले शुरू किए गए चीता पुनर्वास प्रोजेक्ट की तरह ही एक और बड़ा कदम है, जो दिखाता है कि मध्य प्रदेश भारत में वन्यजीव संरक्षण का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है।
कुल मिलाकर, कान्हा में जंगली भैंसों की वापसी न केवल एक प्रजाति के पुनर्जीवन की कहानी है, बल्कि यह प्रकृति और इंसान के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास भी है।
