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नोएडा हिंसा: मजदूरों का विरोध बना बड़ा मुद्दा, योगी सरकार का एक्शन

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उत्तर प्रदेश के नोएडा के फेज-2 क्षेत्र में हाल ही में फैक्ट्री मजदूरों का विरोध प्रदर्शन हिंसक रूप ले गया, जिसने राज्य की कानून-व्यवस्था और औद्योगिक माहौल पर सवाल खड़े कर दिए। यह विरोध वेतन वृद्धि, बेहतर कार्य परिस्थितियों और श्रम कानूनों के पालन की मांग को लेकर शुरू हुआ था, लेकिन धीरे-धीरे यह व्यापक अशांति में बदल गया। इस पूरे घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की सरकार ने स्थिति संभालने के लिए कई बड़े कदम उठाए।

विरोध की वजह और मांगें

नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले हजारों मजदूर लंबे समय से कम वेतन और खराब कामकाजी परिस्थितियों से परेशान थे। खासतौर पर हरियाणा में हाल ही में न्यूनतम वेतन में वृद्धि के बाद नोएडा के मजदूरों में असंतोष बढ़ गया।

मजदूरों की प्रमुख मांगों में वेतन वृद्धि, तय कार्य घंटे, ओवरटाइम का उचित भुगतान और साप्ताहिक अवकाश शामिल थे। कई मजदूरों का कहना था कि बढ़ती महंगाई के बीच 10 से 15 हजार रुपये की सैलरी में परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।

हिंसा और हालात

शुरुआत में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के रूप में शुरू हुआ यह आंदोलन जल्द ही हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों ने वाहनों में तोड़फोड़ की, आगजनी की और पुलिस पर पथराव किया।

स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा और सख्ती से हालात नियंत्रित करने पड़े। कई जगहों पर ट्रैफिक जाम और औद्योगिक गतिविधियां भी प्रभावित हुईं।

बताया गया कि हजारों मजदूर इस आंदोलन में शामिल थे और कई लोगों को हिरासत में लिया गया।

सरकार का एक्शन

हिंसा के बाद योगी सरकार तुरंत हरकत में आई। प्रशासन ने मजदूरों की समस्याओं को समझने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाई और बातचीत शुरू की।

इसके अलावा, सरकार ने न्यूनतम वेतन में संशोधन का फैसला भी लिया, ताकि मजदूरों की मांगों को आंशिक रूप से पूरा किया जा सके।

मुख्यमंत्री ने मजदूरों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि सरकार उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी तरह की अफवाहों से बचना चाहिए।