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SIR विवाद: यूपी की राजनीति में “वोटर डिलीशन” बना बड़ा मुद्दा

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उत्तर प्रदेश में हाल ही में हुए “स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR)” के बाद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। इस प्रक्रिया को लेकर जहां एक ओर पारदर्शिता और सुधार का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाला कदम बता रहा है। खास बात यह है कि आंकड़ों में सामने आया है कि सबसे ज्यादा वोटर डिलीशन उन सीटों पर हुआ है, जहां सत्तारूढ़ पार्टी BJP के विधायक हैं।

BJP सीटों पर ज्यादा असर

रिपोर्ट के अनुसार, जिन सीटों पर एक लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए, उनमें से अधिकांश सीटें BJP के कब्जे में हैं। उदाहरण के तौर पर 16 ऐसी सीटों में से 15 पर BJP का प्रतिनिधित्व है। इसी तरह 80,000 से 99,000 के बीच डिलीशन वाली 21 सीटों में से 19 सीटें भी BJP के पास हैं।

यह आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि SIR प्रक्रिया का असर समान रूप से नहीं पड़ा, बल्कि कुछ खास क्षेत्रों में ज्यादा देखने को मिला। इससे राजनीतिक समीकरणों पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

“SIR कर्स” और राजनीतिक चर्चा

राजनीतिक गलियारों में इसे “SIR कर्स” तक कहा जा रहा है, क्योंकि जिन सीटों पर BJP मजबूत मानी जाती थी, वहीं सबसे ज्यादा मतदाता सूची में बदलाव देखने को मिला। हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि यह प्रक्रिया प्रशासनिक कारणों—जैसे डुप्लीकेट नाम, स्थान परिवर्तन या मृत्यु—के कारण की गई है।

देशभर में SIR के तहत बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जिसमें उत्तर प्रदेश में करोड़ों नाम कम हुए हैं। इससे चुनावी गणित और मतदाता आधार पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

Gorakhpur बना अपवाद

दिलचस्प रूप से, मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के क्षेत्र Gorakhpur को इस ट्रेंड से अलग बताया गया है। यहां अपेक्षाकृत कम डिलीशन देखने को मिला, जिससे यह सीट “अपवाद” के रूप में सामने आई है।

हालांकि, Gorakhpur में भी SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए गए थे, लेकिन यह अन्य BJP सीटों की तुलना में कम प्रभावशाली माना जा रहा है।

विपक्ष के आरोप और सियासी असर

विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव का असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है। कुछ नेताओं ने इसे “वोट बैंक प्रभावित करने की रणनीति” तक बताया है। वहीं, चुनाव आयोग और सरकार का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत और पारदर्शी तरीके से की गई है।