उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने राज्य में “जीरो ड्रॉपआउट” लक्ष्य को हासिल करने के लिए समाज से सहयोग की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का दायित्व है कि कोई भी बच्चा स्कूल से बाहर न रहे।
सीएम योगी ने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण नींव बताते हुए कहा कि यदि हर बच्चा शिक्षित होगा, तभी समाज और देश का समग्र विकास संभव है। उनका यह संदेश “स्कूल चलो अभियान” के तहत सामने आया, जिसका उद्देश्य हर बच्चे को स्कूल से जोड़ना है।
समाज की भागीदारी पर जोर
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि सरकार लगातार शिक्षा के क्षेत्र में सुधार कर रही है, लेकिन इस मिशन को सफल बनाने के लिए जनभागीदारी बेहद जरूरी है। उन्होंने अभिभावकों, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों से अपील की कि वे बच्चों को स्कूल भेजने के लिए जागरूकता फैलाएं।
उन्होंने कहा कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रह जाए। यह केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि सामाजिक आंदोलन बनना चाहिए।
जीरो ड्रॉपआउट दर में बड़ा सुधार
सीएम योगी ने बताया कि राज्य में पहले स्कूलों की स्थिति बेहद खराब थी, जिसके कारण बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ाई बीच में छोड़ देते थे। लेकिन अब हालात तेजी से बदले हैं। सरकार के प्रयासों से ड्रॉपआउट दर में भारी गिरावट आई है। पहले जहां यह करीब 19% थी, अब घटकर लगभग 3% रह गई है।
उन्होंने कहा कि लक्ष्य सिर्फ सुधार करना नहीं, बल्कि इसे पूरी तरह समाप्त करना है, ताकि “जीरो ड्रॉपआउट” की स्थिति हासिल की जा सके।
बुनियादी सुविधाओं में सुधार
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी ड्रॉपआउट का बड़ा कारण थी। अब राज्य सरकार ने इस दिशा में बड़े बदलाव किए हैं।
स्कूलों में शौचालय, स्वच्छ पेयजल, बेहतर भवन और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। साथ ही बच्चों को यूनिफॉर्म, किताबें और अन्य सहायता भी दी जा रही है, जिससे शिक्षा को अधिक सुलभ बनाया जा सके।
इन सुधारों के कारण अभिभावकों का भरोसा भी सरकारी स्कूलों पर बढ़ा है।
भविष्य के लिए बड़ा विजन
सीएम योगी ने कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही प्रदेश का भविष्य मजबूत होगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाने के लिए पूरी जिम्मेदारी के साथ काम करें। उन्होंने यह भी कहा कि यदि समाज और सरकार मिलकर काम करें, तो उत्तर प्रदेश “जीरो ड्रॉपआउट” का लक्ष्य जरूर हासिल कर सकता है।
कुल मिलाकर, यह पहल केवल शिक्षा सुधार नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो आने वाले समय में प्रदेश की प्रगति को नई गति दे सकता है।
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