Avimukteshwaranand on Yogi Adityanath: हाल ही में ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Shankaracharya Avimukteshwaranand Sarswati) ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) को लेकर एक विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि “योगी कभी भोगी नहीं हो सकते”, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने कई गंभीर आरोप भी लगाए, जिससे मामला अब केवल धार्मिक टिप्पणी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शंकराचार्य ने योगी आदित्यनाथ के व्यक्तित्व और उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक संत और मुख्यमंत्री के रूप में उनके आचरण में विरोधाभास दिखाई देता है। इस बयान के बाद राजनीतिक और धार्मिक दोनों ही क्षेत्रों में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है।
माघ मेले से शुरू हुआ Yogi Adityanath और Avimukteshwaranand का विवाद
यह पूरा विवाद माघ मेला 2026 के दौरान शुरू हुआ, जब शंकराचार्य और उनके समर्थकों ने आरोप लगाया कि उन्हें संगम में स्नान करने से रोका गया। प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला दिया, जबकि शंकराचार्य ने इसे “अपमान” बताया।
इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी तेज हो गई। योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने बिना नाम लिए कुछ लोगों को “कालनेमि” जैसा बताया, जो संत का वेश धारण कर समाज को भ्रमित करते हैं। इसके जवाब में शंकराचार्य ने कहा कि मुख्यमंत्री को धर्म के बजाय विकास और शासन के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।
आरोपों से बढ़ा विवाद
शंकराचार्य ने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान राजनीति में धर्म का उपयोग किया जा रहा है, जो हिंदू समाज के लिए नुकसानदायक हो सकता है। उन्होंने कहा कि समाज को बांटने वाली नीतियां लंबे समय में धर्म और संस्कृति दोनों को कमजोर करती हैं।
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया कि उन्होंने प्रशासनिक कार्यशैली और धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप को लेकर भी नाराजगी जताई। इससे यह विवाद और गहराता नजर आ रहा है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और असर
इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। जहां कुछ लोग इसे धार्मिक स्वतंत्रता और संतों के सम्मान का मुद्दा बता रहे हैं, वहीं अन्य इसे राजनीतिक बयानबाजी मान रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक अधिकारी के इस्तीफे जैसी घटनाएं भी सामने आईं, जिन्होंने मुख्यमंत्री (Yogi Adityanath) के समर्थन में कदम उठाया।
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