उत्तर प्रदेश सरकार ने बाल श्रम के खिलाफ बड़ी पहल करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जिन क्षेत्रों में बाल श्रम की समस्या अधिक है, वहां विशेष अभियान चलाकर बच्चों को काम से मुक्त कराया जाए और उन्हें स्कूलों से जोड़ा जाए। सरकार का लक्ष्य है कि राज्य का कोई भी बच्चा मजदूरी करने को मजबूर न हो और हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार मिल सके।
सभी जिलों में लागू होगी योजना
मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक में कहा कि बाल श्रमिक विद्या योजना को अब केवल सीमित जिलों तक नहीं रखा जाएगा। वर्तमान में यह योजना 20 जिलों में चल रही है, लेकिन सरकार इसे उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में लागू करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत ऐसे बच्चों को चिन्हित किया जाएगा जो आर्थिक मजबूरी के कारण होटल, ढाबों, दुकानों या फैक्ट्रियों में काम कर रहे हैं।
शिक्षा से जोड़े जाएंगे बच्चे
सरकार का फोकस केवल बाल श्रम रोकने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में लाने पर भी रहेगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि काम करने वाले बच्चों का स्कूलों में दाखिला कराया जाए और उन्हें आर्थिक सहायता भी दी जाए। इससे गरीब परिवारों पर आर्थिक दबाव कम होगा और बच्चे पढ़ाई जारी रख सकेंगे।
राज्य सरकार का मानना है कि शिक्षा ही बाल श्रम खत्म करने का सबसे प्रभावी तरीका है। इसी वजह से स्कूल छोड़ चुके बच्चों की भी पहचान की जाएगी और उन्हें दोबारा स्कूल भेजने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे।
तकनीक और रोजगार पर भी जोर
बैठक में मुख्यमंत्री ने ‘सेवामित्र’ व्यवस्था की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित सेवाएं युवाओं और कुशल कामगारों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा कर रही हैं। वर्तमान में हजारों सेवा प्रदाता और कुशल श्रमिक इस पोर्टल से जुड़े हुए हैं। सरकार चाहती है कि रोजगार के बेहतर अवसर मिलने से गरीब परिवारों के बच्चे मजदूरी की ओर न जाएं।
समाज की भी होगी जिम्मेदारी
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सरकारी कार्रवाई से बाल श्रम पूरी तरह खत्म नहीं होगा। इसके लिए समाज, स्कूलों, उद्योगों और अभिभावकों को भी जागरूक होना पड़ेगा। कई बार गरीबी और जागरूकता की कमी के कारण बच्चे छोटी उम्र में काम करने लगते हैं। ऐसे में लोगों को यह समझना होगा कि बच्चों का भविष्य शिक्षा से बनता है, मजदूरी से नहीं।
सरकार का यह अभियान अगर प्रभावी तरीके से लागू हुआ तो आने वाले समय में हजारों बच्चों का जीवन बदल सकता है और उत्तर प्रदेश बाल श्रम मुक्त राज्य बनने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ा सकता है।
