चैत्र नवरात्रि के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी और उसके प्रमुख अखिलेश यादव पर जोरदार हमला बोला। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि “आपको कब्रिस्तान प्यारा था, आपने वहां पैसा दिया, हमें मंदिर प्यारा हैं और हम मंदिर के लिए पैसा देंगे।” इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर धार्मिक मुद्दों को लेकर बहस तेज हो गई है।
‘कब्रिस्तान बनाम मंदिर’ बयान से सियासी घमासान
सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि पहले की सरकार में मंदिर के विकास पर ध्यान नहीं देती थी, जबकि कब्रिस्तानों के लिए धन खर्च किया जाता था। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने हजारों मंदिरों के सुंदरीकरण और विकास के लिए काम किया है और धार्मिक स्थलों को नई पहचान दी है।
उन्होंने बिना नाम लिए समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए यह भी कहा कि जनता का पैसा वहां खर्च होना चाहिए, जहां आस्था और सांस्कृतिक विरासत को मजबूती मिले। इस बयान के दौरान सभा में ‘जय श्रीराम’ के नारे भी लगे, जिससे माहौल पूरी तरह राजनीतिक और धार्मिक रंग में दिखा।
विकास बनाम पहचान की राजनीति
सीएम योगी ने अपने भाषण में कहा कि उत्तर प्रदेश में पहले पहचान का संकट था, जिसे उनकी सरकार ने खत्म किया। उन्होंने परिवारवाद और जातिवाद की राजनीति पर भी हमला बोला और कहा कि इससे प्रदेश का विकास बाधित हुआ।
उन्होंने दावा किया कि अब प्रदेश में कानून व्यवस्था बेहतर हुई है, विकास कार्य तेजी से हो रहे हैं और धार्मिक स्थलों का कायाकल्प किया गया है। अयोध्या, काशी और अन्य प्रमुख तीर्थ स्थलों के विकास का उदाहरण देते हुए उन्होंने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं।
2027 चुनाव की रणनीति का संकेत
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सीएम योगी का यह बयान आगामी 2027 विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर दिया गया है। भाजपा लगातार धार्मिक और विकास के मुद्दों को साथ लेकर चलने की रणनीति पर काम कर रही है, जबकि सपा सामाजिक समीकरणों पर फोकस कर रही है।
नवरात्रि जैसे धार्मिक मौके पर इस तरह का बयान देना भाजपा के उस एजेंडे को मजबूत करता है, जिसमें आस्था और राजनीति का मेल देखने को मिलता है।
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