अंतरराष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के पर्यावरण संरक्षण को लेकर बड़ा लक्ष्य सामने रखा। उन्होंने कहा कि राज्य का वन क्षेत्र उसकी जनसंख्या के अनुपात में होना चाहिए और इसे बढ़ाकर 16-17 प्रतिशत तक ले जाने की जरूरत है।
वन क्षेत्र बढ़ाने पर जोर
योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में वर्तमान वन क्षेत्र लगभग 10 प्रतिशत के आसपास है, जिसे आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संतुलन, जल संरक्षण और जैव विविधता के लिए हरित क्षेत्र का विस्तार अत्यंत आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य की जनसंख्या के हिसाब से वन क्षेत्र कम है, इसलिए इसे 16-17 प्रतिशत तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बड़े स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाए जा रहे हैं।
रिकॉर्ड स्तर पर वृक्षारोपण अभियान
पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया गया है। सरकार के अनुसार, पिछले 9 वर्षों में 240 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं।
एक दिन में 30 करोड़ से अधिक पौधे लगाने जैसे रिकॉर्ड भी बनाए गए हैं। इसके साथ ही आने वाले समय में 35 से 45 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इन अभियानों में आम जनता, विभिन्न विभागों और स्थानीय निकायों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है, जिससे इसे जन आंदोलन का रूप दिया जा सके।
पर्यावरण और अर्थव्यवस्था का संतुलन
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि जंगल केवल पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। राज्य में 2,400 से अधिक वन आधारित उद्योग स्थापित किए गए हैं, जिससे रोजगार के अवसर बढ़े हैं।
इसके अलावा, इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने, कार्बन क्रेडिट जैसी योजनाओं और ‘नमामि गंगे’ परियोजना के जरिए भी पर्यावरण संरक्षण को मजबूती दी जा रही है।
जैव विविधता और संरक्षण पर फोकस
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में रामसर साइट्स (आर्द्रभूमि) की संख्या बढ़ाकर 11 कर दी गई है और इसे 100 तक ले जाने का लक्ष्य है।
उन्होंने गंगा डॉल्फिन जैसे दुर्लभ जीवों की संख्या में वृद्धि को भी पर्यावरण सुधार का सकारात्मक संकेत बताया।
