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औरैया में ग्रामीण महिलाओं को मिला बकरी पालन का प्रशिक्षण, आत्मनिर्भर बनने की दिशा में पहल

Auraiya Women's
औरैया में ग्रामीण महिलाओं को मिला बकरी पालन का प्रशिक्षण, आत्मनिर्भर बनने की दिशा में पहल
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उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से बकरी पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। इस पहल का मुख्य लक्ष्य महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ना और उनकी आय बढ़ाने के अवसर उपलब्ध कराना है।

विकासखंड औरैया में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में आसपास के करीब 12 गांवों से आई 35 महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं को बकरी पालन से जुड़ी आधुनिक तकनीकों और व्यवसायिक संभावनाओं के बारे में जानकारी दी जा रही है।

औरैया में पांच दिवसीय प्रशिक्षण में सिखाई गई महत्वपूर्ण जानकारी

यह प्रशिक्षण पांच दिनों तक चलने वाला कार्यक्रम है, जिसमें विशेषज्ञों द्वारा महिलाओं को बकरी पालन की पूरी प्रक्रिया समझाई जा रही है। प्रशिक्षण के दौरान बकरी की विभिन्न नस्लों, उनके पालन-पोषण, संतुलित आहार, साफ-सफाई और बीमारियों से बचाव जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई।

प्रशिक्षकों ने महिलाओं को यह भी बताया कि कम लागत में बकरी पालन शुरू करके अच्छी आय अर्जित की जा सकती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

आय बढ़ाने का आसान और लाभकारी साधन

विशेषज्ञों के अनुसार बकरी पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक लाभकारी व्यवसाय माना जाता है। इसमें कम निवेश में भी अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।

प्रशिक्षण में शामिल महिलाओं ने कहा कि यदि उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार तक पहुंच मिलती है तो वे बड़े स्तर पर इस व्यवसाय को शुरू कर सकती हैं। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी बल्कि परिवार की आय में भी वृद्धि होगी।

महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने पर जोर

कार्यक्रम के आयोजकों ने बताया कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य सिर्फ व्यवसाय सिखाना नहीं, बल्कि महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाना भी है।

जब महिलाएं आर्थिक रूप से सक्षम बनती हैं तो परिवार और समाज में उनकी भूमिका भी मजबूत होती है। इस पहल के जरिए ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

आत्मनिर्भर गांव की दिशा में कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ग्रामीण महिलाएं बकरी पालन जैसे व्यवसाय से जुड़ती हैं तो गांवों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।

इससे रोजगार के स्थानीय अवसर बढ़ेंगे और पलायन भी कम होगा। इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ ग्रामीण विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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