केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने असम में चुनावी रैलियों के दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पर तगड़े आरोप लगाए हैं, जिसमें उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के शासनकाल में राज्य की डेमोग्राफी (जनसांख्यिकीय संरचना) बदलने की कोशिश की गई थी। शाह के अनुसार, कांग्रेस के समय में राज्य की सीमाएं काफी हद तक खुली रहने से अवैध घुसपैठियों का प्रवाह बढ़ा और यह असम की सामाजिक-आर्थिक संरचना पर गंभीर प्रभाव डालने लगा।
अमित शाह (Amit Shah) का दावा है कि कांग्रेस के शासन काल में राज्य के कई जिलों में घुसपैठियों की संख्या बढ़कर लाखों तक पहुंच गई थी, जिससे स्थानीय समुदाय विशेष रूप से रोजगार, भूमि और संसाधनों के मामले में प्रभावित हुए। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के समय सीमा सुरक्षा और निगरानी पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया, जिससे अवैध प्रविष्टियां बनी रहीं।
Amit Shah ने गिनाई BJP सरकार की उपलब्धियां
अमित शाह ने यह भी जोर देकर कहा कि
“भारतीय जनता पार्टी-(बीजेपी) की सरकार ने पिछले दशक में असम में घुसपैठ रोकने और सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। भाजपा सरकार ने सीमा सुरक्षा को सुदृढ़ किया, घुसपैठियों के प्रवेश को रोका और कथित अतिक्रमण से भूमि वापस दिलाने के प्रयास किए हैं।”
अमित शाह ने कहा कि
“इस दिशा में पहले पांच साल मुख्य रूप से घुसपैठ रुकवाने पर और अगले पांच साल में अतिक्रमण हटाने पर केंद्रित रहे।”
शाह ने यह दावा भी किया कि भाजपा सरकार ने कई अवैध कब्जे वाली भूमि को मुक्त कराया और असम में शांति एवं विकास को बढ़ावा दिया। उन्होंने असम में सड़क, पुल और बुनियादी ढांचे के निर्माण का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस की तुलना में भाजपा सरकार ने असम की प्रगति में अधिक योगदान दिया है।
Amit Shah ने की असम की जनता से ये अपील
अमित शाह (Amit Shah) ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि
“असम के आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा को समर्थन देकर ही राज्य को पूरी तरह से घुसपैठ के प्रभाव से मुक्त किया जा सकता है।”
उन्होंने कहा कि
“भाजपा सरकार तीसरे कार्यकाल में राज्य के सभी अवैध घुसपैठियों को बाहर निकालने के लिए प्रतिबद्ध है और इससे असम की असली पहचान संरक्षित रहेगी।”
यह बयान असम विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनजर दिया गया है, जहां घुसपैठ और सीमाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दे राजनीतिक बहस का केंद्र बने हुए हैं। कांग्रेस और भाजपा के बीच यह टकराव असम की मतदाताओं के बीच भी व्यापक चर्चा का विषय रहा है, जिससे चुनावी रणभूमि और भी गरमाई है।
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