ज्योतिरमठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (Swami Avimukteshwaranand Ji) सरस्वती ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) और भाजपा (BJP) सरकार पर कड़ा हमला किया है। उन्होंने यह आरोप लगाया कि भाजपा के भीतर दो अलग-अलग विचारधाराएँ उभर कर सामने आ रही हैं — एक बेहद कठोर और दूसरा विवाद के बाद डैमेज-कंट्रोल करने वाला। अविमुक्तेश्वरानंद (Swami Avimukteshwaranand Ji) ने स्पष्ट किया कि यह अलग-अलग सोच का परिणाम है कि विवाद बढ़ गया है और उसका राजनीतिकरण भी हो रहा है।
शंकराचार्य Avimukteshwaranand ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दिया 40 दिन का अल्टीमेटम
शंकराचार्य (Avimukteshwaranand )ने कहा कि भाजपा सरकार ने उनके पद, प्रतिष्ठा और शंकराचार्य पद के प्रति जो रुख अपनाया है वह चिंता का विषय है। उन्होंने मुख्यमंत्री को एक चेतावनी भी दी है और कहा कि
“उन्होंने योगी आदित्यनाथ को 40 दिन का अल्टीमेटम दिया है, जिसमें से आधा समय पहले ही बीत चुका है।”
उन्होंने अपने बयान में आगे कहा कि
“इस समय के बाद वे घोषित करेंगे कि मुख्यमंत्री असली हिंदू हैं या नकली, जिसका सीधा असर उत्तर-प्रदेश में राजनीतिक और धार्मिक वातावरण पर पड़ सकता है।”
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (Avimukteshwaranand) ने यह भी कहा कि
“संत का वेश धारण करने वाले लोग यदि समाज में भ्रम फैला रहे हैं तो उन्हें उजागर करना धर्माचार्यों का कर्तव्य है।”
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आगे कहा कि
“केवल दिखावे या राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक पदों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।”
सुनवाई के दौरान उन्होंने यह तर्क भी दिया कि शंकराचार्य पद कोई चुनावी पद नहीं है, जिसे किसी भी व्यक्ति द्वारा राजनीतिक माध्यम से अर्जित किया जा सके।
क्यों हुआ ये विवाद?
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब प्रयागराज के माघ मेले में अविमुक्तेश्वरानंद (Avimukteshwaranand) और उनके समर्थकों को पुलिस द्वारा रथ/पालकी पर आगे बढ़ने से रोका गया था। इसे लेकर उन्होंने प्रशासन पर अनुचित रोक-टोक और लाठीचार्ज जैसे गंभीर आरोप लगाए थे, जिससे प्रकरण और तूल पकड़ गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में बयान देते हुए कहा कि
“हर कोई शंकराचार्य नहीं बन सकता और किसी को धार्मिक पद का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए।”
उन्होंने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि
“भीड़-भाड़ वाले आयोजनों में अनुशासन रखना आवश्यक है।”
इसके जवाब में अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री की भाषा और रवैये की आलोचना करते हुए इसे संत के अनुरूप नहीं बताया। उन्होंने यह भी कहा कि योगी आदित्यनाथ को आत्मा-मंथन करना चाहिए और राज्यपाल आनंदी बेन पटेल से मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।
राजनीतिक विरोधी दलों ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। समाजवादी पार्टी के नेताओं ने मुख्यमंत्री के बयान का विरोध करते हुए इसे राजनीतिक द्वंद्व और धर्म-राजनीति का एक हिस्सा बताया है।
