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योगी आदित्यनाथ और RSS सरसंघचालक मोहन भागवत के बीच हुई 40 मिनट की मीटिंग, इन बातों पर हुई चर्चा

Yogi Adityanath and Mohan Bhagwat
योगी आदित्यनाथ और RSS सरसंघचालक मोहन भागवत के बीच हुई 40 मिनट की मीटिंग, इन बातों पर हुई चर्चा
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के बीच राजधानी लखनऊ में अहम बैठक हुई, जो करीब 40 मिनट तक चली और इसमें मुख्य रूप से आगामी 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीतिक तैयारियों पर चर्चा हुई। यह मुलाकात RSS के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों के तहत लखनऊ में आयोजित की गई गतिविधियों के बीच आयोजित की गई थी और राजनीतिक तथा संगठनात्मक दोनों ही दृष्टिकोणों से इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

चुनावी माहौल की तैयारी में जुटे योगी आदित्यनाथ और मोहन भागवत

सूत्रों के अनुसार बैठक में सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय को प्राथमिकता दी गई, साथ ही सरकार की योजनाओं और उस पर सामाजिक तथा राजनीतिक प्रतिक्रिया का आकलन भी किया गया। ऐसे में यह बैठक न केवल एक औपचारिक शिष्टाचार बैठक थी, बल्कि आने वाले चुनावी माहौल को देखते हुए रणनीतिक संवाद का एक हिस्सा भी मानी जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक 2027 के लिए BJP और RSS के बीच साझा चुनावी योजना, सामाजिक समीकरण और संगठनात्मक मजबूती को लेकर हुई है। उत्तर प्रदेश, देश का सबसे बड़ा और राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण राज्य होने के कारण, यहां की चुनावी रणनीति का निर्णय राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रभाव डालता है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मोहन भागवत के बीच इन बातों पर हुई चर्चा

बैठक के दौरान सरकार की विकास योजनाओं, कानून-व्यवस्था और जनसंपर्क अभियानों पर भी संभावित रूप से चर्चा हुई — खासकर उन मुद्दों पर जो जनता के बीच राजनीतिक संदेश पहुंचाने में सहायक होंगे। उत्तर प्रदेश में विकास, निवेश, रोजगार सृजन जैसे विषयों को मुख्यमंत्री योगी लगातार अपनी प्राथमिकता के रूप में प्रस्तुत करते आए हैं, और इन मुद्दों का संगठनात्मक समर्थन चुनावी रणनीति में अहम माना जाता है।

सामाजिक समीकरण भी चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। RSS का व्यापक संगठनात्मक नेटवर्क और उसका समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच का अनुभव BJP के लिए चुनावी संदेश को मजबूत करने में उपयोगी हो सकता है। बैठक में सामाजिक विविधता और संतुलन पर भी रणनीति तैयार करने की संभावनाएं जाहिर की जा रही हैं जिससे पार्टी को व्यापक जनसमर्थन मिल सके।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह बैठक सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि सरकार-संगठन के बीच तालमेल और चुनावी संदेश को एकीकृत करने का संकेत देती है। 2027 के चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर ऐसे कदम BJP और RSS दोनों के लिए अहम होंगे।

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