उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में वंदे मातरम् के विरोध और राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान को “देशद्रोह” के समान बताया है। यह टिप्पणी उन्होंने बजट सत्र के दौरान विधान परिषद/विधानसभा में कही, जहां उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वे संविधान का नाम लेकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं और राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् का विरोध कर रहे हैं।
योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा कि वंदे मातरम्, जिसे स्वतंत्रता संग्राम के समय से भारत की राष्ट्रीय गौरव गाथा के रूप में देखा जाता है, भारत की आत्मा और इतिहास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इसे नकारना या इससे दूरी बनाना भारत माता और उसके संघर्ष को नकारने जैसा है, जो किसी भी भारतीय नागरिक के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकता।
योगी आदित्यनाथ ने कहा वंदे मातरम का सम्मान करना सभी का कर्तव्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि
“वंदे मातरम् को संविधान सभा ने राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया था और इसका सम्मान करना सभी का कर्तव्य है।”
इस संदर्भ में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सार्वजनिक समारोहों में वंदे मातरम् के गायन को अनिवार्य करने वाले निर्णय का स्वागत भी किया। उन्हें यह कदम राष्ट्र की प्रतिष्ठा और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को बढ़ावा देने वाला बताया।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अगर कोई भारत में रहकर वंदे मातरम् गाने से इनकार करता है, तो वह हमारे राष्ट्रीय मूल्यों और भावनाओं के खिलाफ है। उन्होंने यह तक कहा कि ऐसे लोगों को भारत में रहने का औचित्य नहीं बनता, क्योंकि वे देश के स्वरूप और इतिहास को ही नकार रहे हैं।
वंदे मातरम पर राजनीतिक और सामाजिक विवाद एवं बहस जारी
सीएम योगी आदित्यनाथ का यह बयान उसी समय आया है जब वंदे मातरम् को लेकर देशभर में राजनीतिक और सामाजिक बहसें तेज हो रही हैं। कुछ समूहों और नेताओं ने वंदे मातरम् के विरोध को धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी उठाया है, जबकि समर्थक इसे राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताते हैं।
हाल के दिनों में, कुछ धार्मिक विद्वानों ने कहा है कि कुछ समुदायों के लिए वंदे मातरम् के कुछ श्लोक उनकी धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ हो सकते हैं, जिससे यह मुद्दा और अधिक संवेदनशील बन गया है। ऐसे बयान राजनीति में भी सवालों और प्रतिक्रियाओं को जन्म दे रहे हैं।
इसके अलावा, मध्य प्रदेश सहित कुछ अन्य राज्यों में भी वंदे मातरम् के गायन को लेकर अनिवार्यता और आंदोलन जैसे मुद्दे उठे हैं, जिससे यह विषय न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि देशभर में विवादित और चर्चित बना हुआ है।
योगी का बयान स्पष्ट रूप से यह दर्शाता है कि राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान और उनका विरोध अब सिर्फ सांस्कृतिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक बहस और पहचान का भी हिस्सा बन चुका है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस विषय पर बहस और बयानबाजी जारी रहने की संभावना है।
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