लखनऊ में शुक्रवार को जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित भव्य समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके संदेश को याद किया। रिजर्व पुलिस लाइंस में आयोजित कार्यक्रम में सीएम योगी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी झांकियों का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने भारतीय संस्कृति, आस्था और मंदिरों के इतिहास से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखे।
श्रीकृष्ण के संदेश को बताया आज भी प्रासंगिक
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म जेल की काल कोठरी के अंधेरे में हुआ था, लेकिन उन्होंने अपने जीवन से समाज को प्रकाश का मार्ग दिखाया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का अवतार धर्म, सत्य और न्याय की स्थापना के लिए हुआ था। मुख्यमंत्री ने लोगों से उनके जीवन और शिक्षाओं से प्रेरणा लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का कर्म संदेश आज भी हर व्यक्ति को अपने क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करता है।
मंदिरों को लेकर सीएम योगी ने कही बड़ी बात
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि आक्रांता मंदिरों को तोड़ सकते हैं, लेकिन लोगों की आस्था को समाप्त नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया जा सकता है, लेकिन भारतीय मूल्यों और विश्वास को खत्म नहीं किया जा सकता। योगी ने कहा कि मंदिरों के ऊपर दूसरी इमारतें बनाई जा सकती हैं, लेकिन लोगों के मन में बसे भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण को कोई छू नहीं सकता।
सोमनाथ और काशी विश्वनाथ का किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में सोमनाथ मंदिर का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर को कई बार नुकसान पहुंचाया गया, लेकिन भारत ने उसे फिर से बनाया। इसी तरह उन्होंने अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि लंबे समय की चुनौतियों के बावजूद आज वहां भव्य राम मंदिर मौजूद है। उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर का भी जिक्र किया और मंदिर के पुनर्निर्माण में अहिल्याबाई होल्कर के योगदान को याद किया। साथ ही आधुनिक समय में काशी विश्वनाथ धाम के विकास का उल्लेख किया।
आस्था मिटाने वालों पर भी साधा निशाना
सीएम योगी ने कहा कि इतिहास में ऐसे कई प्रयास हुए, जिनका उद्देश्य भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना को कमजोर करना था। उनके अनुसार, जिन्होंने भारत और उसकी आस्था को मिटाने का प्रयास किया, वे स्वयं इतिहास के पन्नों में मिट गए, जबकि भारत आज भी अपनी सांस्कृतिक यात्रा के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने लोगों से अपनी परंपराओं और मूल्यों से जुड़े रहने का आह्वान किया।
कर्म पर ध्यान देने की अपील
जन्माष्टमी समारोह में मुख्यमंत्री ने भगवद्गीता के कर्म संदेश को भी प्रमुखता से रखा। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपने कर्मक्षेत्र में खुद को पहचानना चाहिए और श्रेष्ठ कार्य करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन’ का उल्लेख करते हुए कर्म पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही। मुख्यमंत्री के अनुसार, श्रीकृष्ण का यह संदेश आज भी समाज और प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में महत्वपूर्ण है।
भव्य समारोह में मौजूद रहे कई नेता
लखनऊ में आयोजित जन्माष्टमी समारोह में कई प्रमुख लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा, विधायक जय देवी और विधायक नीरज बोरा सहित अन्य लोग शामिल हुए। समारोह के दौरान भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी झांकियों ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
