उत्तर प्रदेश में जमीन-जायदाद से जुड़े राजस्व मामलों के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर योगी सरकार ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। दाखिल-खारिज, वरासत, पैमाइश और राजस्व वादों को लंबे समय तक लंबित रखने के मामले में अब सात उपजिलाधिकारी (SDM) सरकार के रडार पर हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राजस्व परिषद ने अधिकारियों के प्रदर्शन की समीक्षा की है।
RCCMS के आंकड़ों से सामने आई तस्वीर
राजस्व परिषद ने राजस्व कोर्ट कंप्यूटर मैनेजमेंट सिस्टम (RCCMS) में उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर खराब प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को चिह्नित किया है। इनमें लखनऊ की सरोजनीनगर और सदर तहसील के SDM के अलावा मऊ और प्रतापगढ़ की कुछ तहसीलों के अधिकारी भी शामिल हैं। चिह्नित अधिकारियों से लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की जा सकती है।
सरोजनीनगर में महज 4 फीसदी मामलों का निस्तारण
समीक्षा में लखनऊ की सरोजनीनगर तहसील के SDM (न्यायिक) का प्रदर्शन सबसे खराब पाया गया। 22 दिसंबर 2025 से 31 मई 2026 के बीच उनके न्यायालय में 221 मामले दर्ज हुए, लेकिन इनमें केवल नौ मामलों का निस्तारण हो सका। इस तरह निस्तारण की दर महज 4.07 फीसदी रही। वहीं लखनऊ सदर तहसील में 1,000 मामलों में से 403 का निस्तारण हुआ, जिसकी दर 40.30 फीसदी रही।
मऊ और प्रतापगढ़ के अधिकारी भी निशाने पर
राजस्व परिषद की समीक्षा में मऊ के मधुबन और प्रतापगढ़ के कुंडा व रानीगंज के अधिकारियों का प्रदर्शन भी अपेक्षित स्तर से कम पाया गया। मधुबन में 276 में से 55, कुंडा में 297 में से 80 और रानीगंज में 418 में से 133 मामलों का निस्तारण किया गया। इसके अलावा रानीगंज और कुंडा के अन्य अधिकारियों के रिकॉर्ड की भी समीक्षा की गई है। संबंधित जिलाधिकारियों से इन अधिकारियों का लिखित स्पष्टीकरण लेकर रिपोर्ट मांगी गई है।
पहले ही 10 तहसीलदारों पर हो चुकी कार्रवाई
राजस्व मामलों में लापरवाही के खिलाफ सरकार की कार्रवाई यहीं नहीं रुकी है। पिछले एक सप्ताह में 10 तहसीलदार और नायब तहसीलदार निलंबित किए जा चुके हैं, जबकि 13 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। पांच अधिकारियों को हाल ही में निलंबित किया गया था। इससे पहले एक सितंबर को भी चार तहसीलदार और एक नायब तहसीलदार निलंबित किए गए थे।
23 सितंबर तक मुख्यमंत्री कार्यालय को रिपोर्ट
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 29 अगस्त को राजस्व अदालतों में लंबित मामलों की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए मामलों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। सरकार अब RCCMS के जरिए अधिकारियों के कामकाज की निगरानी कर रही है। चिह्नित सात SDM से जुड़े स्पष्टीकरण की रिपोर्ट 23 सितंबर तक मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जानी है। इससे साफ है कि राजस्व मामलों में लापरवाही को लेकर सरकार आगे भी कार्रवाई जारी रख सकती है।
