उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाने वाले योगी सरकार ने एक बार फिर बड़ा कदम उठाया है। राजधानी लखनऊ के वीवीआईपी इलाके में स्थित गौतमपल्ली थाने पर हुई कार्रवाई में पूरे पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का स्पष्ट उदाहरण मानी जा रही है।
जाने गौतमपल्ली थाने का पूरा मामला
मामला लखनऊ के गौतमपल्ली थाना क्षेत्र का है, जो मुख्यमंत्री आवास के बेहद करीब स्थित एक संवेदनशील इलाका माना जाता है। आरोप है कि थाने के पुलिसकर्मियों ने एक व्यक्ति को हिरासत में लेकर उसे छोड़ने के बदले करीब 2.5 लाख रुपये की रिश्वत मांगी और वसूली भी की। पीड़ित ने इस मामले की शिकायत सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचाई। शिकायत मिलते ही मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए गए।
जांच में बड़ा खुलासा
जांच की जिम्मेदारी पुलिस कमिश्नर के नेतृत्व में सौंपी गई। जांच के दौरान आरोप सही पाया गया और यह पुष्टि हुई कि पुलिसकर्मियों ने अवैध वसूली की थी। इस खुलासे के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए पूरे थाने के स्टाफ को हटाने का निर्णय लिया।
पूरे थाने पर गिरी गाज
कार्रवाई के तहत थाना प्रभारी (SHO) सहित सभी दरोगा और सिपाहियों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया। यह एक बेहद दुर्लभ कदम है, जब किसी एक मामले में पूरे थाने के स्टाफ को एक साथ हटाया गया हो। इस कदम को सरकार की सख्त चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है कि भ्रष्टाचार किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
नई तैनाती और आगे की चुनौती
कार्रवाई के बाद नए थाना प्रभारी की नियुक्ति की गई है, जिनकी जिम्मेदारी अब थाने की छवि सुधारना और जनता का विश्वास दोबारा कायम करना होगी।
इस घटना ने यह भी साफ कर दिया है कि चाहे क्षेत्र कितना भी संवेदनशील या वीआईपी क्यों न हो, कानून से ऊपर कोई नहीं है।
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