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संभल में मंदिर विवाद पर सीएम योगी का बड़ा बयान, बोले- ‘बाबर की औलादों ने तोड़ा’

Sambhal yogi adityanath
संभल में मंदिर विवाद पर सीएम योगी का बड़ा बयान, बोले- 'बाबर की औलादों ने तोड़ा'
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने हाल ही में संभल में मंदिर-मस्जिद विवाद को लेकर बड़ा बयान दिया है, जिसके बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। उन्होंने संभल को सनातन परंपरा से जुड़ा प्राचीन तीर्थ बताते हुए कहा कि यह स्थान हजारों वर्षों पुराना है और इसका उल्लेख धार्मिक ग्रंथों में मिलता है।

मुख्यमंत्री ने अपने बयान में यह भी कहा कि संभल का इतिहास इस्लाम से भी पुराना है और यहां कई प्राचीन धार्मिक स्थल मौजूद रहे हैं। उनके अनुसार, ऐतिहासिक तथ्यों और आस्था के आधार पर इस क्षेत्र की पहचान को समझना जरूरी है।

मंदिर-मस्जिद विवाद पर क्या बोले योगी

सीएम योगी ने यह भी कहा कि जिन धार्मिक स्थलों को लेकर विवाद है, उन्हें लेकर सच्चाई सामने आनी चाहिए। उन्होंने पहले भी यह राय व्यक्त की थी कि यदि किसी विवादित ढांचे के नीचे मंदिर होने के प्रमाण मिलते हैं, तो उसे सम्मानपूर्वक वापस किया जाना चाहिए।

उनके इस बयान को संभल में चल रहे मंदिर-मस्जिद विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है, जहां एक ऐतिहासिक मस्जिद को लेकर यह दावा किया गया है कि वह प्राचीन मंदिर के अवशेषों पर बनी है।

संभल का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व

संभल को हिंदू धार्मिक मान्यताओं में विशेष स्थान प्राप्त है। मान्यता है कि भगवान विष्णु के कल्कि अवतार का जन्म यहीं होगा। मुख्यमंत्री ने भी अपने संबोधन में इस बात का जिक्र करते हुए कहा कि संभल केवल एक शहर नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा का केंद्र है।

इतिहासकारों और विभिन्न पक्षों के बीच इस विषय को लेकर अलग-अलग मत हैं, लेकिन यह स्पष्ट है कि यह मुद्दा केवल धार्मिक नहीं बल्कि ऐतिहासिक और राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बन गया है।

विवाद और तनाव की पृष्ठभूमि

संभल में मस्जिद सर्वे को लेकर पहले भी तनाव और हिंसा की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। एक अदालत के आदेश पर सर्वे के दौरान स्थिति बिगड़ गई थी, जिससे इलाके में तनाव बढ़ गया।

इस तरह की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि मंदिर-मस्जिद विवाद केवल कानूनी मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता से भी जुड़ा हुआ है।

राजनीति और समाज पर असर

योगी आदित्यनाथ के इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। एक ओर जहां समर्थक इसे सांस्कृतिक विरासत की पुनर्स्थापना से जोड़ रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे सांप्रदायिक मुद्दों को हवा देने वाला कदम बता रहा है।

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