उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने 20 फ़रवरी 2026 को विधानसभा में एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि अप्रैल 2026 से शिक्षामित्रों को मासिक मानदेय ₹18,000 और अनुदेशकों (अनुदेशक) को ₹17,000 प्रतिमाह मिलेगा। इससे पहले शिक्षामित्रों को ₹10,000 और अनुदेशकों को लगभग ₹9,000 का ही मानदेय दिया जाता था। यह बड़ा कदम संविदा शिक्षण कर्मचारियों के लंबे समय से चले आ रहे वेतन वृद्धि के मांग का समाधान माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को दिया होली से पहले तोहफा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) के इस फैसले के बाद शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के वेतन में लगभग 80 % तक की वृद्धि हुई है। खासकर उन लोगों के लिए यह राहत बड़ी मायने रखती है जो कठिन परिस्थितियों में शिक्षा के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे हैं। योगी सरकार के इस फैसले का मकसद संविदा कर्मचारियों को आर्थिक रूप से अधिक स्थिरता प्रदान करना और उनके पारिवारिक खर्चों में आसानी लाना है।
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 में भाजपा सरकार के गठन के बाद ही शिक्षामित्रों का मानदेय पहले 3,000 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये किया गया था, लेकिन पिछले कई सालों से मानदेय में और वृद्धि की मांग चल रही थी। अब यह वृद्धि सीधे 18,000 रुपये तक कर दी गई है, जो एक बड़े वर्ग के जीवन स्तर में सुधार की उम्मीद जगाती है।
शिक्षामित्रों और अनुदेशक हैं सरकार के इस फैसले से खुश
राज्य में लगभग 1.4 लाख से अधिक शिक्षामित्र और करीब 25,000 अनुदेशक कार्यरत हैं, जो इस फैसले से प्रत्यक्ष लाभान्वित होंगे। कई संविदा कर्मचारियों ने इस घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि बढ़ा हुआ मानदेय उनकी रोजमर्रा की जरूरतों और परिवार के लिए राहत देगा। कई शिक्षामित्रों का कहना है कि महंगाई की इस दौर में पहले वाले मानदेय से जीवन और परिवार का खर्च चलाना मुश्किल था।
CM Yogi Adityanath ने साथ में दी ये सौगात
सीएम योगी (CM Yogi Adityanath) ने न केवल मानदेय बढ़ाने का ऐलान किया है बल्कि शिक्षकों के लिए ₹5 लाख तक का कैशलेस इलाज सुविधा भी उपलब्ध कराने की बात कही है। इसके अलावा राज्य सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास, बालिकाओं के लिए विशेष कार्यक्रम और उच्च शिक्षा के विस्तार जैसे कई अन्य कदमों की भी घोषणा की है।
इस घोषणा को राज्य के संविदा शिक्षण कर्मचारियों की दशकों पुरानी मांग के समाधान की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है और इससे शिक्षा व्यवस्था से जुड़े हजारों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा।
