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उत्तर प्रदेश में राशन से वंचित हो सकते हैं 17 लाख से ज्यादा लोग, सपा सांसद के इस कदम से मुश्किल में लाखो लोग

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उत्तर प्रदेश में राशन से वंचित हो सकते हैं 17 लाख से ज्यादा लोग, सपा सांसद के इस कदम से मुश्किल में लाखो लोग
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समाजवादी पार्टी के सांसद जावेद अली खान ने 29 जनवरी 2026 को राज्यसभा में सरकार से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत आय के पात्रता मानदंडों में संशोधन की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम 2013 में लागू हुआ था और उस समय ग्रामीण क्षेत्र में सालाना 2 लाख रुपये तथा शहरी क्षेत्र में 3 लाख रुपये तक की आय को गरीबी की सीमा मानकर लाभार्थी सूची में शामिल किया गया था।

बीतते 13 वर्षों में देश की आर्थिक परिस्थितियाँ बदल चुकी हैं। महंगाई दर, जीवनयापन की लागत और आय स्तर में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। इसके बावजूद खाद्य सुरक्षा अधिनियम में आज भी वही पुराने आय मानदंड लागू हैं। सांसद ने बताया कि अन्य क्षेत्रों जैसे आयकर स्लैब, वेतन आयोग, मनरेगा मजदूरी और सांसदों के वेतन में समय-समय पर संशोधन हुआ है, पर NFSA के मानदंड अपडेट नहीं किए गए हैं।

जावेद अली ने एक अर्थशास्त्री से परामर्श कर यह भी बताया कि 2013 के 2 लाख रुपये आज के आर्थिक संदर्भ में लगभग 3.60 लाख रुपये (ग्रामीण) तथा 5.40 लाख रुपये (शहरी) के बराबर हैं। उन्होंने कहा कि यही संशोधित आय सीमा वर्तमान समय के लिए उपयुक्त होगी।

उत्तर प्रदेश में 17 लाख से अधिक लोगों का राशन कार्ड खतरे में

सांसद जावेद अली खान ने यह भी दावा किया कि यदि आय मानदंडों को अद्यतन नहीं किया गया, तो उत्तर प्रदेश में लगभग 17 लाख लोगों के राशन कार्ड रद्द होने का खतरा है। इसका मुख्य कारण यह है कि उनकी वर्तमान आय पुरानी निर्धारित सीमा से अधिक हो गई है, जिससे वे तकनीकी रूप से लाभार्थी सूची से बाहर हो जाएंगे।

उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम विशेष रूप से गरीब और निचले आर्थिक वर्ग के परिवारों के लिए एक वरदान साबित हुआ है, खासकर कोविड-19 महामारी के दौरान जब लाखों लोगों को राशन कार्ड के माध्यम से जीवन-निर्वाह सहायता मिली थी।

सांसद ने विधायी हाउस में यह प्रश्न भी उठाया कि इतने बड़े पैमाने पर राशन कार्ड रद्द करना गरीबों के साथ अन्याय जैसा होगा। उन्होंने इस पर केंद्र सरकार से सकारात्मक और त्वरित कार्रवाई की अपील की।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA): एक Uberblick

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, जिसे 5 जुलाई 2013 को लागू किया गया था, का उद्देश्य देश की आबादी के लिए रियायती खाद्यान्न उपलब्ध कराना है। इसके तहत प्राथमिकता प्राप्त परिवारों (PHH) को प्रति व्यक्ति हर महीने 5 किलो अनाज और अंत्योदय अन्न योजना (AAY) में शामिल परिवारों को प्रति परिवार 35 किलो अनाज उपलब्ध कराया जाता है।

यह अधिनियम देश के गरीब और कमजोर वर्ग को जीवन-निर्वाह सहायता प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रहा है। हालांकि, समय के साथ आर्थिक बदलावों के कारण पात्रता मानदंडों का पुनर्मूल्यांकन आवश्यक हो गया है, ताकि वास्तव में जरूरतमंद लोग इस योजना के दायरे से बाहर न हो जाएं। सांसद जावेद अली खान की यह मांग इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

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