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टाटा संस के आईपीओ से पहले होने जा रहा बड़ा बदलाव, सेबी के नियमों के चलते बदलने पड़ सकते हैं कंपनी के अधिकार!

Tata Sons
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देश के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में शामिल टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस (Tata Sons) को लेकर एक बार फिर बड़ी खबर सामने आई है। कंपनी संभावित आईपीओ (IPO) की तैयारी के तहत अपने नियमों और शर्तों की समीक्षा कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के लिस्टिंग नियमों के अनुरूप खुद को तैयार करना है। इस प्रक्रिया में कंपनी के निदेशक मंडल की नियुक्ति, स्वतंत्र निदेशकों की भूमिका और टाटा ट्रस्ट्स के विशेष अधिकारों में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, अभी तक इन बदलावों को अंतिम मंजूरी नहीं मिली है।

कंपनी के नियमों में क्यों हो सकता है बदलाव?

टाटा संस (Tata Sons) अपने आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (AoA) की समीक्षा कर रही है। यह दस्तावेज कंपनी के संचालन, शेयरधारकों के अधिकारों और निदेशक मंडल की शक्तियों से जुड़े नियम निर्धारित करता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस (Tata Sons) की लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। मौजूदा नियमों के तहत ट्रस्ट्स को निदेशक मंडल में एक-तिहाई तक सदस्यों को नामित करने का अधिकार प्राप्त है। कुछ महत्वपूर्ण फैसलों के लिए ट्रस्ट्स द्वारा नामित निदेशकों की सहमति भी जरूरी होती है।

यदि कंपनी शेयर बाजार में सूचीबद्ध होती है, तो इन विशेष अधिकारों को सेबी के नियमों के अनुरूप बनाना पड़ सकता है। इसके लिए शेयरधारकों की मंजूरी भी आवश्यक हो सकती है।

आरबीआई के फैसले से क्यों बढ़ा आईपीओ का दबाव?

टाटा संस (Tata Sons) के IPO की चर्चा तेज होने के पीछे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का फैसला अहम है। आरबीआई ने सितंबर 2026 में कंपनी की कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के रूप में पंजीकरण छोड़ने की अर्जी खारिज कर दी थी। इसके बाद कंपनी पर लागू नियामकीय नियमों के अनुसार आगे बढ़ने का दबाव बढ़ गया।

टाटा संस (Tata Sons) को सितंबर 2022 में ऊपरी स्तर की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के रूप में वर्गीकृत किया गया था। इस श्रेणी की कंपनियों के लिए निर्धारित समयसीमा में शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने का प्रावधान है। अब कंपनी को अपने अगले कदमों पर नियामकीय आवश्यकताओं के हिसाब से काम करना होगा।

क्या टाटा संस का आईपीओ जल्द आएगा?

IPO की दिशा में तैयारी आगे बढ़ने के बावजूद इसकी अंतिम तारीख और पूरी प्रक्रिया को लेकर अभी स्पष्टता नहीं है। कंपनी को अपने नियमों में संभावित संशोधन, शेयरधारकों की मंजूरी और लिस्टिंग से जुड़ी दूसरी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।

टाटा ट्रस्ट्स के अध्यक्ष नोएल टाटा कंपनी की लिस्टिंग के विकल्प को लेकर सतर्क रुख अपना चुके हैं, जबकि कंपनी के निदेशक मंडल ने लिस्टिंग की दिशा में कदम बढ़ाने का समर्थन किया है। ऐसे में आगे का रास्ता नियामकीय जरूरतों और शेयरधारकों के बीच सहमति पर निर्भर करेगा।

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