बिहार विधान परिषद चुनाव 2026 में सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में शानदार जीत दर्ज करने वाले डॉ. राहुल राज ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में औपचारिक वापसी कर ली है। पार्टी में शामिल होने के तुरंत बाद डॉ. राहुल राज ने सारण के सांसद राजीव प्रताप रूडी के साथ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से लोकसेवक आवास पर शिष्टाचार भेंट की और अपनी दूसरी राजनीतिक पारी के लिए मुख्यमंत्री से मार्गदर्शन व आशीर्वाद प्राप्त किया।
गठबंधन में टिकट कटने पर हुए थे बागी, पार्टी ने किया था निष्कासित
प्रदेश स्तर के पदाधिकारी रहे हैं: डॉ. राहुल राज भाजपा में पहले राज्य स्तर पर संगठनात्मक पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं और सारण शिक्षक क्षेत्र से लंबे समय से तैयारी कर रहे थे।
सीट बंटवारे में जदयू के खाते में गई सीट: एनडीए गठबंधन के तहत सीट समझौते में यह सीट जनता दल (यूनाइटेड) के कोटे में चली गई और वहां से आनंद पुष्कर को एनडीए का अधिकृत प्रत्याशी बनाया गया।
बगावत और 6 साल के लिए निष्कासन: टिकट न मिलने पर डॉ. राहुल राज ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरने का फैसला किया। पार्टी के अधिकृत गठबंधन प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लड़ने के कारण भाजपा ने उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था।
चुनावी मुकाबले में दर्ज की निर्णायक जीत
बगावत और निष्कासन के बावजूद डॉ. राहुल राज ने जमीनी संपर्क के दम पर मुकाबले में बढ़त बनाए रखी:
पहली वरीयता से ही रहे आगे: पहले चरण की मतगणना में डॉ. राहुल राज को 2,723 मत मिले, जबकि जदयू के आनंद पुष्कर को 2,440 मत, जन सुराज के आफाक अहमद को 1,999 मत और राजद के प्रो. जयराम यादव को 1,708 मत प्राप्त हुए थे।
1,815 मतों के अंतर से जीत: अंततः दूसरी वरीयता के मतों की गिनती के बाद डॉ. राहुल राज को कुल 4,965 मत प्राप्त हुए और उन्होंने एनडीए समर्थित जदयू प्रत्याशी आनंद पुष्कर (3,150 मत) को 1,815 मतों के बड़े अंतर से पराजित किया।
जीत के बाद घर वापसी और शीर्ष नेतृत्व से संवाद
निर्दलीय जीत हासिल करने के तुरंत बाद भाजपा संगठन ने उनके निष्कासन को रद्द करते हुए उन्हें दोबारा पार्टी में शामिल कर लिया। सांसद राजीव प्रताप रूडी की मौजूदगी में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से हुई इस मुलाकात को बिहार के हालिया सियासी घटनाक्रम में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
डॉ. राहुल राज ने कहा कि चुनाव के दौरान उन्होंने शिक्षकों के सातवें वेतनमान और सेवा संबंधी लंबित मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था और अब वे सदन में शिक्षक समाज की आवाज को मजबूती से रखेंगे।
