प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कांग्रेस पार्टी पर कड़ी टिप्पणी की है और उन्हें लोगों के बीच लोकप्रिय होने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सिर्फ सीटों पर कब्जा करना, नेताओं को आगे भेजना या आक्रामक रणनीति अपनाना ही किसी को प्रधानमंत्री नहीं बनाता — इसके लिए जनता के दिल जीतने जरूरी हैं। इस बात का ज़िक्र उन्होंने विपक्ष के हालिया व्यवहार पर प्रतिक्रिया देते हुए किया है, जिसमें उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी राजनीति का तरीका बदलने की ज़रूरत है।
नरेंद्र मोदी ने इस दौरान यह भी कहा कि कांग्रेस पहले से ही कई तरह की आलोचनाओं और विवादों की वजह से “exposed” यानी जनता की नजरों में खुल चुकी है, इसलिए उसे जनता के भरोसे को जीतने पर ध्यान देना चाहिए बजाय राजनीतिक ड्रामों और प्रदर्शनों के।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण का राजनीतिक संदर्भ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह हमला उस दौरान आया है जब कांग्रेस पार्टी और उसके कार्यकर्ता पिछले दिनों इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में हुए विवादित शर्टलेस प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बहस का केंद्र बनी हुई है। मोदी ने इस प्रदर्शन को ‘मर्यादाओं का उल्लंघन’ करार देते हुए कांग्रेस की नीतियों और तरीके पर सवाल उठाए हैं।
विपक्षी पार्टी को निशाने पर लेते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यदि कोई राजनीति में सत्ता हासिल करना चाहता है तो उसे सत्ता की कुंजी जनता की अपेक्षाओं और भरोसे को समझने में ढूँढनी होगी, न कि केवल दिखावे या आक्रामक नारेबाज़ी से। उन्होंने यह भी तंज कसा कि कांग्रेस के नेता न केवल अपने रणनीतिक फैसलों में असमर्थ दिखाई देते हैं, बल्कि वे जनता की भावनाओं को समझने में भी पीछे हैं।
मोदी की आलोचना का असर
नरेंद्र मोदी के इस तीखे बयान का राजनीतिक माहौल पर गहरा असर पड़ा है। विपक्ष ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस तरह के हमले राजनीति को मुद्दों से भटकाते हैं और सच्चे सवालों पर से ध्यान हटाते हैं। वे कहते हैं कि सरकार को जनता की समस्याओं, जैसे बेरोजगारी, महंगाई और शिक्षा के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए बजाय विपक्षी दलों को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाने के।
हालांकि, प्रधानमंत्री के समर्थक इस बात पर जोर दे रहे हैं कि किसी भी पार्टी को सत्ता में आने के लिए जनता के बीच लोकप्रिय होना और सकारात्मक एजेंडा देना ज़रूरी है।
समापन: लोकतंत्र में प्रतिस्पर्धा
भारत जैसे लोकतंत्र में सत्ता के लिए प्रतिस्पर्धा स्वाभाविक है। प्रधानमंत्री मोदी के बयानों से यह स्पष्ट होता है कि केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक लड़ाई का स्वरूप और भी तीखा होता जा रहा है।
आगामी चुनावों से पहले इस तरह के बयान और प्रतिक्रियाएँ राजनीतिक रणनीतियों और संदेशों को और भी अधिक उजागर कर रहे हैं। विरोधी दलों के लिए यह चुनौती है कि वे अपनी नीतियों को जनता तक स्पष्ट रूप से पहुँचाएँ और जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरें।
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